नई दिल्ली: भारतीय सेना के लिए स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में नागास्त्र-2 एंटी-टैंक लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नागपुर की कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड इस प्रणाली की आपूर्ति कर रही है। यह एक प्रकार का आत्मघाती ड्रोन है, जिसे लक्ष्य की निगरानी करने और निर्धारित लक्ष्य पर हमला करने के लिए तैयार किया गया है।
नागास्त्र-2 की बताई गई प्रमुख विशेषताओं में लगभग 50 किलोमीटर तक की परिचालन दूरी और 60 मिनट तक उड़ान भरने की क्षमता शामिल है। इसमें दिन और रात में निगरानी के लिए कैमरे दिए गए हैं। इन सुविधाओं की मदद से यह प्रणाली अलग-अलग परिस्थितियों में लक्ष्य की पहचान और निगरानी करने में सक्षम हो सकती है।
इस प्रणाली में चार किलोग्राम का वारहेड होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, इसमें इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता भी बताई गई है, जो इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी बाधाओं के प्रभाव को कम करने में मदद करती है। ऐसी तकनीक आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन की संचार और संचालन क्षमता बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है।
स्वदेशी नागास्त्र-2 को भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी ने अगस्त 2026 में इसके तकनीकी परीक्षण पूरे किए हैं। हालांकि, सेना को इसकी आपूर्ति की वास्तविक स्थिति, तैनाती और सभी प्रदर्शन संबंधी दावों की पुष्टि के लिए रक्षा मंत्रालय या भारतीय सेना की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना उचित होगा।

