नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली के भारत मंडपम में ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने और देश को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा कि समय के साथ चुनौतियां बदली हैं और नई सामाजिक बुराइयां सामने आई हैं। इन समस्याओं का समाधान करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और देश के प्रत्येक नागरिक को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सामाजिक एकता, सामूहिक प्रयास और राष्ट्रीय संकल्प बेहद जरूरी हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब चिन्मय मिशन भी अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने की दिशा में आगे बढ़ चुका होगा। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य और चिन्मय मिशन की विचारधारा के बीच समानता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों का रास्ता एक है। पीएम मोदी ने वेदों में राष्ट्र के कल्याण और उसे महान बनाने की भावना का जिक्र करते हुए कहा कि देश को इसी विचार के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने लोगों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की अपील की। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी आवश्यक है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत की सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में विदेशों से करीब 600 प्राचीन मूर्तियां वापस लाई गई हैं। उनके अनुसार, देश अब उस दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसका सपना भारत के ऋषियों और राष्ट्रभक्तों ने देखा था। पीएम मोदी ने सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और भारतीय परंपराओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की प्राचीन विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव को भारत के अमृत काल से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोबॉट से भी बातचीत की। होलोबॉट ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी वास्तविक व्यक्ति जैसा दिखने वाला त्रिआयामी डिजिटल स्वरूप प्रस्तुत किया जाता है। स्वामी चिन्मयानंद ने वर्ष 1951 में चिन्मय मिशन की स्थापना की थी। उनका निधन 3 अगस्त 1993 को हुआ था। मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर तीन दिवसीय ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ आयोजित किया जा रहा है, जो 25 अक्टूबर तक चलेगा। इस आयोजन के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद के आध्यात्मिक विचारों, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेशों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।