फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की कुटरा शाखा से स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड योजना के तहत आरओ वाटर प्लांट की दुकान खोलने के लिए 4.75 लाख रुपये का ऋण लेने के बाद किस्तें जमा करना बंद करने का मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधन ने ऋण लेने वाले व्यक्ति पर शपथ पत्र की शर्तों का उल्लंघन कर बैंक के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। मामले में कार्रवाई न होने पर शाखा प्रबंधक ने न्यायालय की शरण ली।

न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक (पूर्ववर्ती आर्यावर्त बैंक) की कुटरा शाखा के तत्कालीन प्रबंधन द्वारा 28 फरवरी 2020 को फतेहगढ़ थाना क्षेत्र के रसूलपुर निवासी धीरज भदौरिया पुत्र छविनाथ को स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत आरओ वाटर प्लांट की दुकान स्थापित करने के लिए 4 लाख 75 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया था। यह ऋण बैंक के एक खाते के माध्यम से दिया गया था।

आरोप है कि ऋण लेने के दौरान संबंधित व्यक्ति ने बैंक के आवश्यक प्रपत्रों पर गवाहों के समक्ष हस्ताक्षर किए थे। साथ ही शपथ पत्र देकर बैंक के नियमों का पालन करने और ऋण की किस्तें समय से जमा करने का आश्वासन दिया था। शपथ पत्र में यह भी कहा गया था कि यदि ऋण का भुगतान नहीं किया गया तो बैंक उसकी चल-अचल संपत्ति से वसूली कर सकता है।

बैंक प्रबंधन के मुताबिक, कुछ किस्तें जमा करने के बाद ऋण की अदायगी बंद कर दी गई। निरीक्षण के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि संबंधित व्यक्ति ने अपना प्रोजेक्ट बंद कर दिया है। बैंक ने इसे ऋण की शर्तों का उल्लंघन बताते हुए बकाया रकम की वसूली के लिए कई बार संपर्क किया। आरोप है कि अधिवक्ता के माध्यम से पंजीकृत डाक से नोटिस भेजे जाने के बावजूद ऋण का भुगतान नहीं किया गया।

प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि बैंक की ओर से मामले में कार्रवाई के लिए फतेहगढ़ थानाध्यक्ष को शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर 4 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक को भी प्रार्थना पत्र दिया गया। इसके बावजूद सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए शाखा प्रबंधक ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और मामले में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई कराने की मांग की।

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने नहीं आया है। आरोपों की पुष्टि पुलिस की जांच और न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही हो सकेगी।