फर्रुखाबाद। कादरीगेट थाना क्षेत्र के ग्राम नगला खैरबंद में करीब 50 साल पुराने मकानों को लेकर विवाद सामने आया है। रेलवे द्वारा जमीन को अपनी बताते हुए पैमाइश कराए जाने और मकानों को बुलडोजर से गिराए जाने की आशंका के चलते कई परिवारों में चिंता बढ़ गई है। प्रभावित परिवारों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मकानों को गिराने की कार्रवाई रुकवाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मकान तोड़े गए तो वे बेघर हो जाएंगे।
जिलाधिकारी को 21 अक्टूबर 2026 को दिए गए प्रार्थना पत्र में समर पाल पुत्र सोनेलाल जाटव, अजय सिंह पुत्र रघुनाथ प्रसाद जाटव, माला देवी पत्नी महेश चंद्र वाल्मीकि तथा विमला देवी पत्नी अजय सिंह जाटव ने बताया कि वे अनुसूचित जाति से संबंधित गरीब और भूमिहीन परिवार हैं। उनके अनुसार, करीब पांच दशक पहले तत्कालीन ग्राम प्रधान ने उनके पिता को ग्राम समाज की जमीन पर इंदिरा आवास बनवाकर दिए थे। तभी से उनके परिवार इन मकानों में रह रहे हैं।
प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि जिस जमीन पर मकान बने हैं, वह रेलवे की नहीं, बल्कि ग्राम समाज की भूमि है। आरोप है कि रेलवे विभाग जमीन को अपना बताते हुए तहसीलदार सदर के माध्यम से उसकी पैमाइश करा रहा है। प्रभावित परिवारों ने यह भी आशंका जताई है कि उनके पुराने मकानों को जबरन बुलडोजर से गिराया जा सकता है।
परिवारों का कहना है कि वे लगभग 50 वर्षों से इन मकानों में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। यदि मकान तोड़ दिए गए तो उनके सामने रहने और परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
प्रार्थना पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी से मांग की गई है कि मामले की जांच कराई जाए और जमीन के स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट होने तक मकानों को गिराने की कार्रवाई रोकी जाए। साथ ही तहसील प्रशासन को निर्देशित करने की मांग की गई है कि उनके आवासों को न तोड़ा जाए।
जमीन के स्वामित्व और मकानों को लेकर लगाए गए दावों पर रेलवे विभाग तथा प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है। मामले में वास्तविक स्थिति संबंधित अभिलेखों की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

