एनएबीएआरडी ने एनएसडीसी के जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) निर्गम के माध्यम से एनएसई सोशल स्टॉक एक्सचेंज में ₹4 करोड़ का योगदान दिया।

प्लेसमेंट और विदेश में तैनाती संबंधी सहायता के माध्यम से जापान और जर्मनी में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य।

लखनऊ: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) निर्गम की नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) प्लेटफॉर्म पर सफल लिस्टिंग के साथ नवोन्मेषी और परिणाम-आधारित विकास वित्त के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नाबार्ड ने इस निर्गम में ₹4 करोड़ का अभिदान किया है, जिससे मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 600 ग्रामीण युवाओं के लिए विदेश में कौशल प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम को सहायता मिलेगी।

यह पहल एनएसडीसी द्वारा मध्य प्रदेश सरकार के साथ साझेदारी में कार्यान्वित की जा रही है। यह एक अभिनव मिश्रित-वित्तपोषण मॉडल प्रस्तुत करती है, जिसमें सोशल स्टॉक एक्सचेंज से प्राप्त वित्तपोषण, परिणाम-आधारित सार्वजनिक वित्तपोषण और लाभार्थियों की भागीदारी शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य वित्तीय संसाधनों को मापनीय सामाजिक परिणामों से जोड़ना और विकास वित्तपोषण में जवाबदेही तथा प्रभाव को सुदृढ़ करना है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को जापान और जर्मनी में रोजगार के लिए आवश्यक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल और दक्षताएँ प्रदान करके उनके लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करना है। प्रतिभागियों को भाषा प्रशिक्षण, क्षेत्र-विशिष्ट कौशल विकास, सांस्कृतिक अभिमुखीकरण और प्रमाणन के साथ-साथ विदेश में प्लेसमेंट के लिए दस्तावेजीकरण तथा तैनाती संबंधी सहायता सहित समग्र सहयोग प्रदान किया जाएगा।

पारंपरिक कौशल विकास कार्यक्रमों में जहाँ मुख्य रूप से प्रशिक्षण पूरा करने पर ध्यान दिया जाता है, वहीं इस पहल को सत्यापित परिणामों पर केंद्रित किया गया है। इसमें युवाओं की वास्तविक विदेशी तैनाती, रोजगार में निरंतरता और उनकी आजीविका में सुधार को प्राथमिकता दी जाएगी। इस दृष्टिकोण के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और ग्रामीण युवाओं को वैश्विक कार्यबल में अवसर प्राप्त करने में सहायता देने का प्रयास किया जाएगा।

परियोजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और विकासात्मक प्रभाव को मापने के लिए लाभार्थी-स्तर पर निगरानी, समय-समय पर रिपोर्टिंग और स्वतंत्र परिणाम सत्यापन की व्यवस्था शामिल है। कार्यान्वयन के दौरान केवल गतिविधियों और उपलब्धियों की संख्या के बजाय वास्तविक परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

यह लिस्टिंग भारत में सोशल स्टॉक एक्सचेंज व्यवस्था के विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इस निर्गम को समर्थन देकर नाबार्ड का उद्देश्य यह प्रदर्शित करना है कि किस प्रकार नवोन्मेषी वित्तीय साधनों के माध्यम से उच्च सामाजिक प्रभाव वाली पहलों के लिए पूंजी जुटाई जा सकती है और साथ ही परिणामों का सुदृढ़ मापन तथा हितधारकों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है। नाबार्ड सोशल स्टॉक एक्सचेंज व्यवस्था के विकास में सक्रिय रूप से सहयोग देता रहा है और ग्रामीण विकास की जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए परिणामोन्मुखी वित्तपोषण मॉडल को प्रोत्साहित करता है।

यह पहल ग्रामीण कौशल विकास, रोजगार-योग्यता और आजीविका संबंधी कार्यक्रमों के बड़े स्तर पर वित्तपोषण के लिए सोशल स्टॉक एक्सचेंज के उपयोग का एक उदाहरण बनने की उम्मीद है। इसके सफल कार्यान्वयन से ग्रामीण उद्यमिता, जलवायु अनुकूलन, महिला-नेतृत्व वाले विकास, सामाजिक समावेशन और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में इसी प्रकार के परिणाम-आधारित वित्तपोषण मॉडल अपनाने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

ग्रामीण युवाओं की आकांक्षाओं को वैश्विक रोजगार अवसरों से जोड़कर और संस्थागत वित्त को मापनीय सामाजिक परिणामों के साथ संबद्ध करके नाबार्ड समावेशी एवं सतत विकास के मंच के रूप में सोशल स्टॉक एक्सचेंज की परिवर्तनकारी क्षमता को प्रदर्शित करना चाहता है। इस परियोजना से परोपकारी संस्थानों, विकास एजेंसियों, कॉरपोरेट संस्थाओं और निवेशकों की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, ताकि नवोन्मेषी वित्तपोषण के माध्यम से महत्वपूर्ण विकासात्मक चुनौतियों का समाधान किया जा सके।