पूसा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 324 के साथ बेहद खराब श्रेणी में, 56 निगरानी केंद्रों में 36 पर हवा खराब; प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर लोगों की सेहत के लिए गंभीर चिंता बनता जा रहा है। शुक्रवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 230 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के समीर ऐप के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के 56 निगरानी केंद्रों में से तीन पर हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई, जबकि 36 केंद्रों पर वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई। पूसा में सबसे अधिक AQI 324 रहा। केवल 17 केंद्रों पर हवा मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई। प्रदूषण के बढ़ते स्तर से सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। आधिकारिक पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले नौ दिनों तक वायु गुणवत्ता में किसी बड़े सुधार की संभावना नहीं है, जिससे दिल्ली-एनसीआर के लोगों को फिलहाल राहत मिलने के आसार कम हैं।
वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, 23 से 26 अक्टूबर तक दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में बनी रह सकती है। इसके बाद भी अगले छह दिनों तक स्थिति में खास सुधार की उम्मीद नहीं है। ऐसे में प्रदूषण का असर आने वाले दिनों में भी बना रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खराब वायु गुणवत्ता का प्रभाव विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ सकता है। लोगों को प्रदूषण के स्तर पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक शुक्रवार को सफदरजंग में अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शनिवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने तथा अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
आईआईटीएम पुणे के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक 20.3 प्रतिशत रही। इसके बाद आवासीय स्रोतों का योगदान 5.2 प्रतिशत, पराली जलाने का 5.1 प्रतिशत और उद्योगों का 4.2 प्रतिशत दर्ज किया गया। निर्माण गतिविधियों से 2.6 प्रतिशत, ऊर्जा क्षेत्र से दो प्रतिशत, कचरा जलाने से 1.8 प्रतिशत और सड़क की धूल से 1.4 प्रतिशत प्रदूषण का योगदान बताया गया। एनसीआर के जिलों में गुरुग्राम की हिस्सेदारी 8.8 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक रही। झज्जर का योगदान 6.1 प्रतिशत, गौतमबुद्ध नगर का 4.7 प्रतिशत, गाजियाबाद का 3.7 प्रतिशत और फरीदाबाद का 3.3 प्रतिशत दर्ज किया गया। ये आंकड़े प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों के योगदान का अनुमान प्रस्तुत करते हैं और बताते हैं कि राजधानी की हवा को साफ रखने के लिए परिवहन सहित कई क्षेत्रों में नियंत्रण के उपाय जरूरी हैं।
वायु गुणवत्ता सूचकांक के मानकों के अनुसार, शून्य से 50 तक AQI अच्छी, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बेहद खराब और 401 से 500 गंभीर श्रेणी में माना जाता है। इस लिहाज से दिल्ली का 230 AQI लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है। लगातार खराब हवा के मद्देनजर वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर धूल प्रबंधन, कचरा जलाने पर रोक और प्रदूषण फैलाने वाले अन्य स्रोतों की निगरानी महत्वपूर्ण होगी। नागरिकों को भी अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने और प्रदूषण अधिक होने पर बाहरी गतिविधियों में सावधानी बरतने की जरूरत है। आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकारी उपायों के साथ मौसम की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

