विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ मुंबई में हुई मुलाकात को लेकर कांग्रेस की आलोचना का जवाब दिया है। 22 अक्टूबर को NDTV वर्ल्ड समिट में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन नेता जुल्फिकार अली भुट्टो की 1972 में शिमला में हुई मुलाकात का उदाहरण दिया। जयशंकर ने सवाल उठाया कि दिल्ली से बाहर किसी विदेशी नेता से मिलने जाने को समन किए जाने के रूप में क्यों देखा जा रहा है।
विवाद की शुरुआत तब हुई, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रुबियो की मुंबई यात्रा और जयशंकर के साथ उनकी बैठक पर तंज कसा था। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने यह सवाल भी उठाया था कि भारत में होने वाली बैठक की जानकारी अमेरिकी पक्ष की ओर से पहले क्यों दी गई।
जयशंकर ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि देश की राजधानी से बाहर विदेशी नेताओं के साथ बैठकें होना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की जयपुर में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ से मुलाकात का भी जिक्र किया। विदेश मंत्री ने कहा कि इस तरह की कूटनीतिक बैठकों को समन के रूप में देखना उचित नहीं है और इस विषय पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।
इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी मुंबई में बैठक आयोजित करने के फैसले का बचाव किया था। उन्होंने बताया कि पिछले करीब एक दशक से विदेशी नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी दिल्ली के अलावा देश के दूसरे शहरों में भी होती रही है। इसके उदाहरण के तौर पर वडोदरा, अहमदाबाद, वाराणसी, गोवा, केवड़िया और अमृतसर में हुई विभिन्न कूटनीतिक बैठकों का उल्लेख किया गया। भारत और अमेरिका के बीच मुंबई में हुई बातचीत में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा शामिल थी।

