फर्रुखाबाद। जिले के इतिहास में बाबू ब्रजनंदन लाल का नाम सामाजिक सेवा, किसान हितों, शिक्षा और सहकारिता आंदोलन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महापुरुष के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने अंग्रेजी शासन के दौरान किसानों, मजदूरों, वंचितों और आम जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करने से लेकर महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने तक उनके प्रयासों ने समाज को नई दिशा देने का काम किया। उनकी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उनके जीवन, संघर्ष और समाजसेवा को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 25 अक्टूबर का दिन फर्रुखाबाद के लिए गौरव का अवसर है। जिले के बढ़पुर गांव में जन्मे बाबू ब्रजनंदन लाल ने अपने कार्यों से न केवल स्थानीय समाज को प्रभावित किया, बल्कि किसानों और आम नागरिकों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए भी महत्वपूर्ण पहल की। उनका मानना था कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब किसानों को आर्थिक मजबूती मिले, महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा के अवसर प्राप्त हों तथा गरीब और वंचित वर्ग को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर दिया जाए।

बाबू ब्रजनंदन लाल को सहकारिता आंदोलन के प्रमुख अग्रदूतों में गिना जाता है। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के दौरान सहकारिता बैंक की स्थापना के लिए प्रयास किए, ताकि किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण मिल सके और आम जनता को बचत तथा आर्थिक सहायता की सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। उनके प्रयासों का उद्देश्य किसानों और व्यापारियों को साहूकारी व्यवस्था पर निर्भरता से राहत दिलाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। सहकारिता के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और जरूरतमंद लोगों तक ऋण सुविधा पहुंचाने की दिशा में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बाबू ब्रजनंदन लाल ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य के रूप में छह वर्ष तक कार्य किया। इस दौरान उन्होंने किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। अंग्रेजी शासन के दौरान जनता पर लगाए जाने वाले लगान और मालगुजारी के बोझ को कम कराने के लिए उन्होंने प्रयास किए। किसानों और गरीब परिवारों को राहत दिलाने के उद्देश्य से प्रस्ताव रखे तथा उनकी समस्याओं को शासन के सामने मजबूती से प्रस्तुत किया।

उन्होंने राजनीतिक बंदियों के साथ होने वाले कथित उत्पीड़न और अमानवीय व्यवहार को रोकने के लिए भी विधान परिषद में आवाज उठाई। राजनीतिक बंदियों को सुरक्षित वातावरण, स्वास्थ्य सुविधाएं और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर उनके प्रयासों का उल्लेख किया गया। उनका मानना था कि किसी भी सभ्य समाज में व्यक्ति के अधिकारों और मानवीय गरिमा की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

उस दौर में महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा के सामने अनेक सामाजिक बाधाएं थीं। बाबू ब्रजनंदन लाल ने इन कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाते हुए महिलाओं और बालिकाओं के लिए राजकीय विद्यालय खोले जाने की मांग की। उन्होंने विधान परिषद में इस विषय को तर्कों के साथ उठाया और शिक्षा के विस्तार पर जोर दिया। उनके प्रयासों से संबंधित प्रस्तावों के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन देने की दिशा में पहल हुई।

उनकी सोच केवल शहरों तक सीमित नहीं थी। वह चाहते थे कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा प्राप्त करने के पर्याप्त अवसर मिलें। इसके लिए ब्लॉक और ग्राम स्तर तक विद्यालयों की स्थापना की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया। उनका मानना था कि शिक्षित महिला परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

बाबू ब्रजनंदन लाल ने प्रधान और जिला परिषद सदस्य के रूप में भी जनहित से जुड़े कार्य किए। उनके सामाजिक योगदान में गरीबों, भूमिहीनों और किसानों को भूमि पट्टे उपलब्ध कराने के प्रयासों का विशेष उल्लेख किया जाता है। वह चाहते थे कि जरूरतमंद परिवारों को आजीविका का साधन मिले और वे आत्मनिर्भर बन सकें।

उनकी जनसेवा का दायरा केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। रामलीला के आयोजन के लिए उन्होंने एक बड़े मैदान का दान दिया। बढ़पुर में शीतला माता मंदिर का भव्य निर्माण कराया और मंदिर की व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए ट्रस्ट की स्थापना कराई। बताया जाता है कि इस ट्रस्ट में जिलाधिकारी, तहसीलदार और उनके परिवार के सदस्यों को शामिल किया गया, ताकि मंदिर का संचालन प्रशासनिक देखरेख में किया जा सके।

बाबू ब्रजनंदन लाल ने फर्रुखाबाद में स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं के विस्तार के लिए भी अपनी निजी भूमि दान की। जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने मिशन अस्पताल की स्थापना के लिए भूमि दी। इसी तरह युवाओं को शिक्षित करने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए क्रिश्चियन इंटर कॉलेज के निर्माण हेतु भी अपनी निजी भूमि दान की।

इसके अतिरिक्त बढ़पुर ब्लॉक सहित विभिन्न सरकारी भवनों के निर्माण में सहयोग के लिए उन्होंने अपनी भूमि उपलब्ध कराई। उनके इन कार्यों से स्पष्ट होता है कि वह व्यक्तिगत संपत्ति को केवल निजी लाभ का साधन नहीं मानते थे, बल्कि उसका उपयोग जनकल्याण के लिए करना भी अपना दायित्व समझते थे।

बाबू ब्रजनंदन लाल के जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से उनकी निकटता भी बताया जाता है। दोनों ने इंग्लैंड में बैरिस्टर की शिक्षा प्राप्त की थी। उनके पारिवारिक संबंध भी पुराने बताए जाते हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मोतीलाल नेहरू और बाबू गेंदन लाल के बीच वकालत के दौरान घनिष्ठ संबंध थे, जिसके चलते दोनों परिवारों में भी आत्मीयता थी।

बताया जाता है कि बाबू ब्रजनंदन लाल देश को समृद्ध, विकसित और प्रगतिशील बनाने के विषय में जवाहरलाल नेहरू को अपने सुझाव भी देते थे। उनकी सोच में सामाजिक न्याय, शिक्षा, किसानों की आर्थिक मजबूती और आम जनता का कल्याण प्रमुख स्थान रखते थे।

बाबू ब्रजनंदन लाल की जयंती के अवसर पर फर्रुखाबाद के उत्सव गेस्ट हाउस में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान उनके जीवन और समाज के लिए किए गए कार्यों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे महापुरुषों का जीवन समाज को सेवा, समर्पण और जनहित के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि युवा उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज और देश के विकास में अपनी भूमिका निभा सकें।

कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष आदित्य कटियार, कोषाध्यक्ष विभव कटियार, सुमित गंगवार, राजेश सैनी, अंकुर कटियार, धर्मेंद्र कनौजिया, सचिन कटियार, मीडिया प्रभारी अमित वर्मा, रितेश वर्मा, अंशुल सिंह, राजेश गुप्ता और संजय कटियार सहित संस्था के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

कार्यक्रम के समापन पर बाबू ब्रजनंदन लाल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को नमन किया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि किसानों, महिलाओं, गरीबों और आम नागरिकों के हित में किए गए उनके कार्य फर्रुखाबाद की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनका जीवन समाजसेवा, शिक्षा के प्रसार और जनकल्याण के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है।