नई दिल्ली। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की मुंबई में आयोजित बैठकों के बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें वेतन वृद्धि से जुड़े फैसलों पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वर्तमान महंगाई भत्ते को मूल वेतन में शामिल किया जाएगा और नई वेतन संरचना में कर्मचारियों की तनख्वाह कितनी बढ़ेगी।
आयोग की मुंबई यात्रा के दौरान 22 और 23 अक्टूबर को संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श किया गया। हालांकि, बैठक समाप्त होने के बाद भी महंगाई भत्ते को मूल वेतन में विलय करने के किसी अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल संभावित मांग और प्रस्ताव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी केंद्रीय कर्मचारी का मूल वेतन 18,000 है और महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत माना जाए, तो महंगाई भत्ते की राशि 10,800 होगी। इस तरह मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर कुल 28,800 बनते हैं। यह केवल गणना का उदाहरण है, आठवें वेतन आयोग की घोषित वेतन दर नहीं।
आठवें वेतन आयोग से न्यूनतम वेतन, वेतन निर्धारण गुणांक, महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और पेंशन से जुड़े विषयों पर सिफारिशों की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय दिया गया है।
फिलहाल न तो नई न्यूनतम तनख्वाह की अंतिम राशि घोषित हुई है और न ही महंगाई भत्ते के मूल वेतन में विलय पर अंतिम निर्णय सामने आया है। आयोग की सिफारिशों के बाद केंद्र सरकार की मंजूरी से ही नई वेतन व्यवस्था और कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक लाभ की स्थिति स्पष्ट होगी।

