फर्रुखाबाद, 24 अक्टूबर। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता परखने के लिए चार जनपद स्तरीय टीमों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शमसाबाद और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फैजबाग का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मरीजों के पंजीकरण, दवा वितरण, जांच सेवाओं, वार्डों की साफ-सफाई और अभिलेखों की स्थिति का जायजा लिया गया। कई कमियां मिलने पर संबंधित अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए गए।

सीएचसी शमसाबाद में निरीक्षण के समय तक 73 मरीजों का ऑनलाइन पंजीकरण हो चुका था। चिकित्सक ओपीडी में मरीजों का उपचार करते मिले और औषधि वितरण कक्ष में पर्चे के अनुसार दवाएं दी जा रही थीं। हालांकि, साथिया केंद्र के अभिलेखों में 17 अक्टूबर के बाद किशोर-किशोरियों की काउंसलिंग दर्ज नहीं मिली। क्षय रोग केंद्र में पुराने पोस्टर लगे थे और जांच के अभिलेख में केवल दो नमूनों की जांच दर्ज थी।

आपातकालीन कक्ष में जर्जर अलमारी और जंग लगा आईवी स्टैंड मिला। प्रसवोत्तर वार्ड के दरवाजे गंदे थे और भोजन संबंधी पंजिका अद्यतन नहीं मिली। इन कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए।

पीएचसी फैजबाग में 21 मरीजों की ओपीडी और दो मरीजों की प्रयोगशाला जांच दर्ज मिली। केंद्र के सभी कक्ष जर्जर अवस्था में पाए गए। उपलब्ध 195 प्रकार की दवाओं के सापेक्ष 163 प्रकार की औषधियां मौजूद थीं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने स्वास्थ्य इकाइयों में उपलब्ध संसाधनों को क्रियाशील रखने, अभिलेख अद्यतन करने, साफ-सफाई और जांच सेवाओं में सुधार पर जोर दिया। उन्होंने मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और कमियों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर बल दिया।

### 2\. एचआईवी-एड्स नियंत्रण के लिए चिकित्सा अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण

फर्रुखाबाद, 24 अक्टूबर। जनपद में एचआईवी-एड्स संक्रमण की शीघ्र पहचान, रोकथाम और प्रभावी उपचार सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें चिकित्सा अधिकारियों को जांच, परामर्श, उपचार, निगरानी और संक्रमित व्यक्तियों के अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला में स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर समन्वय और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को बिना भेदभाव उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग ने समय पर जांच, उचित परामर्श और उपचार की निरंतरता को संक्रमण नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

प्रशिक्षण के दौरान एचआईवी संक्रमण की वर्तमान स्थिति, 95-95-95 लक्ष्य, यौन संचारित संक्रमणों की जांच, सिफलिस का प्रबंधन, एंटीरेट्रोवाइरल उपचार, एचआईवी और क्षय रोग के संयुक्त संक्रमण तथा विषाणु भार की निगरानी जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। मां से बच्चे में एचआईवी और सिफलिस संक्रमण के संचरण की रोकथाम तथा उच्च जोखिम वाले समूहों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर भी चर्चा हुई।

प्रशिक्षकों ने एचआईवी एवं एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के प्रमुख प्रावधानों और संक्रमित व्यक्तियों के अधिकारों की जानकारी दी। कार्यशाला में केस अध्ययन, समूह चर्चा और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया।

प्रशिक्षण में डॉ. अनंता हजारे, श्री प्रसाद संत, श्री नीरज श्रीवास्तव और दिशा टीम की डीएमडीओ दीप्ति सिंह ने मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक कटारिया, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह, उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुनय कुटार, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सर्वेश यादव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जगमोहन सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों का प्रशिक्षणोत्तर आकलन और प्रतिक्रिया प्राप्त की गई। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में एचआईवी की जांच, उपचार, परामर्श और निगरानी सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।