राजस्थान और हरियाणा में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। कई इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि के कारण तापमान में बदलाव देखने को मिल रहा है। हरियाणा के झज्जर में शनिवार सुबह बारिश के साथ ओले गिरे, जिससे स्थानीय लोगों को बदले मौसम का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग ने हरियाणा के नौ जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। इनमें सिरसा, फतेहाबाद, पानीपत और सोनीपत समेत कई जिले शामिल हैं। लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अचानक तेज हवाएं चलने और बारिश होने से सामान्य जनजीवन, यातायात तथा खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
राजस्थान में भी शुक्रवार को कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। दौसा, सीकर, भरतपुर, जयपुर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ समेत विभिन्न इलाकों में मौसम बदला रहा। वहीं, अलवर और कोटपूतली-बहरोड़ के कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि होने की जानकारी सामने आई। बारिश और ओलों के कारण किसानों की फसलों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है, हालांकि नुकसान का आकलन स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। दूसरी ओर, तमिलनाडु के ऊटी और नीलगिरी क्षेत्र में भारी बारिश के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। ऊटी के थिट्टुक्कल गांव में एक रिजॉर्ट की लगभग 20 फीट ऊंची दीवार गिर गई, जिसके मलबे में दबने से एक सुरक्षा गार्ड गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना में कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
ऊटी में लगातार बारिश से जलभराव और भूस्खलन जैसी घटनाओं ने यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। ऊटी बस स्टैंड के पास पानी भर जाने के कारण सड़क बंद करनी पड़ी, जबकि नीलगिरी इलाके में एक सरकारी बस पर भूस्खलन का मलबा गिरने की सूचना मिली। ऐसी परिस्थितियों में पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कों पर यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि लगातार बारिश से जमीन कमजोर होने और अचानक मलबा गिरने की आशंका बढ़ जाती है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए प्रभावित इलाकों में सुरक्षा सुनिश्चित करना, यातायात को नियंत्रित करना और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना महत्वपूर्ण है। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को जलभराव वाली सड़कों, कमजोर दीवारों तथा भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों से दूर रहने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।
इसी बीच, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के संभावित चक्रवाती तूफान में बदलने को लेकर मौसम विभाग ने चिंता जताई है। उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार, यह सिस्टम 25 अक्टूबर तक गहरे दबाव वाले क्षेत्र में बदल सकता है और 26 अक्टूबर की सुबह तक चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों के बीच पहुंचने या टकराने की आशंका जताई गई है। इस मौसम प्रणाली का प्रभाव बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी बारिश के रूप में देखने को मिल सकता है। हालांकि, तूफान की दिशा, तीव्रता और संभावित प्रभाव में बदलाव संभव है, इसलिए ताजा आधिकारिक पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी है। लोगों को तेज हवाओं, भारी बारिश और संभावित जलभराव से बचाव के लिए सतर्क रहना चाहिए।

