- युवाओं में बढ़ी लोकप्रियता; बोले- अलग विचार रखना पार्टी की खिलाफत नहीं
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राहुल गांधी को गंभीरता से लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राहुल गांधी ने युवा मतदाताओं के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ाई है। थरूर एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने राहुल गांधी पर ध्यान दिया है और इसी वजह से उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले इसी कार्यक्रम में राहुल गांधी का नाम लिए बिना कांग्रेस पर निशाना साधा था। पीएम मोदी ने कहा था कि पता नहीं कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश को दांव पर लगाती रहेगी।
थरूर ने कार्यक्रम के दौरान देश के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान विपक्षी दलों की एकजुटता ने सत्ता परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), भाजपा, समाजवादी और वामपंथी दल एक साथ आए थे और मिलकर तत्कालीन सरकार को हराया था। थरूर के मुताबिक, यह भारत के हालिया राजनीतिक इतिहास का हिस्सा है और इससे विपक्षी एकता के महत्व को समझा जा सकता है। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को प्रत्येक भारतीय नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार बताया, लेकिन स्पष्ट किया कि हिंसा का किसी भी परिस्थिति में समर्थन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने भारत के राजनीतिक हालात की तुलना फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों से करने को भी उचित नहीं माना।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि चुनावी व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी भारतीय नागरिक को उसके संवैधानिक मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। थरूर ने स्पष्ट किया कि चुनाव व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का उद्देश्य सत्ता परिवर्तन कराना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार करना है। उन्होंने नेहा बोरा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदर्शनों और आंदोलन में काफी ऊर्जा भरी। थरूर के मुताबिक, अलग-अलग राजनीतिक दलों और विचारों को स्वीकार करना विपक्षी एकता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विभिन्न विचारों के लिए जगह होनी चाहिए और असहमति को राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम में थरूर ने कांग्रेस के भीतर अपनी स्वतंत्र राय रखने के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अलग विचार रखना पार्टी की खिलाफत करना नहीं होता है। थरूर ने बताया कि वह मतदाताओं के एक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, कांग्रेस के नेता के रूप में पार्टी के लिए प्रचार करते हैं और विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। उन्होंने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि किसी मुद्दे पर अलग राय रखने के बावजूद पार्टी की नीतियों का समर्थन किया जा सकता है। राहुल गांधी की लोकप्रियता, विपक्षी एकता, चुनावी सुधार और पार्टी के भीतर विचारों की स्वतंत्रता पर थरूर की टिप्पणियों ने कार्यक्रम में राजनीतिक चर्चा को केंद्र में ला दिया।

