नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance)1 नवंबर, 2026 से संशोधित मासिक ‘जीएसटी रिटर्न फॉर्म’ (GST Return Form) में प्रस्तावित बदलावों पर एक नवंबर से कारोबारियों और प्रोफेश्नल्स की राय मांगेगा। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के जीएसटी नीति प्रभाग के आयुक्त गौरव सिंह ने कहा कि विभाग जीएसटी ऑडिट प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की दिशा में भी काम करेगा।

केंद्र एवं राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में जीएसटी रिटर्न में देनदारियों और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में संशोधन के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था को मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य विसंगतियों को कम करना और नोटिस या सूचना भेजने की जरूरत घटाना है।

काउंसिल ने जीएसटी फॉर्म जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-1ए और आईएफएफ में सुधारों को मंजूरी दी थी ताकि इन फॉर्म में दी गई जानकारी का मासिक कर भुगतान फॉर्म जीएसटीआर-3बी में दी गई जानकारी से बेहतर मिलान किया जा सके। नए फॉर्म्स के जरिए GSTR-1/1A/IFF और GSTR-3B के बीच डेटा मिलान को मजबूत किया जाएगा ताकि टैक्स लायबिलिटी की गलतियों को सुधारा जा सके। इसका एक और मकसद ऑल्टरनेटिव मैकेनिज्म तैयार करना भी है, जिससे टैक्सपेयर्स को अपने रिटर्न में लायबिलिटी और ITC को संशोधित करने का एक वैकल्पिक विकल्प मिलेगा। इससे गलतियों के चलते मिलने वाले ऑटो-जेनरेटेड नोटिसों में कमी आएगी।

संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म एक नवंबर को MyGov पोर्टल पर पब्लिक फीडबैक के लिए अपलोड कर दिया जाएगा। इन पर 30 नवंबर तक सुझाव दिए जा सकेंगे। संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म एक अप्रैल, 2027 से लागू होगा। बीते 8 अक्टूबर को जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में लिए गए फैसलों करे कानूनी रूप देने के लिए वित्त मंत्रालय का विधि विभाग इन अधिसूचनाओं और परिपत्रों को अंतिम मंजूरी दे चुका है। शुक्रवार को इनके सार्वजनिक होने के बाद टैक्सपेयर्स और उद्योगों को कई बड़े नियमों पर पूरी स्पष्टता मिल जाएगी।