चुनाव आयोग से जुड़े विवाद में ईसी संधू और जोशी की शिकायतों को लेकर नया सवाल खड़ा हो गया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी के अनुसार, इन शिकायतों पर कैबिनेट सचिवालय की ओर से कार्रवाई किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। इस खुलासे ने शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया पर चर्चा तेज कर दी है।
दोनों निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे थे। आरटीआई के जवाब के मुताबिक, ये पत्र 30 जुलाई को दर्ज किए गए और 5 अगस्त तक कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के अधिकारियों तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यालय को भेज दिए गए।
विवाद की जड़ 28 जुलाई को जारी कार्य आवंटन आदेश था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि इससे चुनाव आयोग के आईटी विभाग की निगरानी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को स्पष्ट किया कि संबंधित आदेश लागू नहीं हुए और आईटी विभाग की निगरानी कभी वापस नहीं ली गई।
आरटीआई से यह तो पुष्टि हुई कि शिकायतें प्राप्त हुईं और संबंधित विभागों को भेजी गईं, लेकिन पत्रों की वास्तविक सामग्री और उन पर आगे हुई कार्रवाई का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। कैबिनेट सचिवालय ने संबंधित दस्तावेज जारी करने के लिए 28 रुपये का शुल्क जमा होने तक उन्हें रोक रखा है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि शिकायतों पर बिल्कुल कोई कार्रवाई नहीं हुई; उपलब्ध जानकारी से कार्रवाई की पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

