नई दिल्ली: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल सुधारों की मांग उठाते हुए मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया है। भारत का कहना है कि दुनिया की वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाना जरूरी है। इसी संदर्भ में भारत ने रियर व्यू मिरर में देखकर भविष्य की ओर गाड़ी नहीं चलाने वाली कहावत का इस्तेमाल किया।

भारत ने अपने बयान के जरिए यह संदेश दिया कि दशकों पुरानी व्यवस्था के आधार पर भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना आसान नहीं होगा। बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों, क्षेत्रीय संघर्षों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बीच संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और उसमें विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि मौजूदा परिषद की संरचना आज की वैश्विक वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती। सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी सदस्यों की संख्या तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार को लेकर विभिन्न देशों के बीच चर्चा जारी है।

भारत की इस मांग के केंद्र में संयुक्त राष्ट्र को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण और जवाबदेह बनाना है। सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में भारत का ताजा बयान वैश्विक शासन व्यवस्था में बदलाव की मांग को फिर से अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाता है।