शमशाबाद, फर्रुखाबाद। विकास खंड शमशाबाद की ग्राम पंचायत कुइयांधीर में उचित दर की दुकान (राशन की दुकान) के आवंटन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मृतक कोटेदार की मृत्यु के करीब सात माह बाद भी गांव में राशन की दुकान बहाल न होने और दूसरे गांव से राशन वितरण कराए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है। वहीं, दुकान के आवंटन की प्रक्रिया, मृतक आश्रित को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए दिए गए समय और आवेदक की शैक्षिक अंकतालिका के सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। इस संबंध में सुशील कुमार के नेतृत्व में करीब तीन दर्जन ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ को शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि राशन की दुकान के आवंटन में निर्धारित नियमों और पारदर्शिता का पालन किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि मार्च 2026 में ग्राम पंचायत के मूल कोटेदार की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद गांव में राशन की दुकान की व्यवस्था बहाल होने के बजाय उसे दूसरे गांव से संबद्ध कर दिया गया। नतीजतन, कुइयांधीर के राशन उपभोक्ताओं को खाद्यान्न लेने के लिए दो से तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। इससे सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और ऐसे परिवारों को उठानी पड़ रही है, जिनके लिए इतनी दूर जाकर राशन लाना मुश्किल है।

मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने संबंधित खाद्य निरीक्षक से दुकान के आवंटन के संबंध में जानकारी मांगी तो शुरुआत में उन्हें बताया गया कि नियमानुसार मृतक कोटेदार के परिवार के सदस्य को दुकान आवंटित की जाएगी। इसके बाद संबंधित परिवार को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए सितंबर 2026 तक का समय दिए जाने की बात सामने आई। ग्रामीणों ने इस अवधि को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर किस शासनादेश, नियम अथवा विभागीय प्रावधान के तहत दस्तावेज जमा करने के लिए इतना समय दिया गया। उन्होंने संबंधित आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि मृतक आश्रित को दुकान आवंटित करने का प्रावधान लागू होता है तो उसकी पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की नियमानुसार जांच की जानी चाहिए। वहीं, यदि संबंधित आवेदक पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करता है अथवा मृतक आश्रित को दुकान आवंटित करने का नियम लागू नहीं होता है, तो नियमानुसार खुली लॉटरी या अन्य निर्धारित पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आवंटन प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन किया गया या नहीं।

मामले में आवेदक की शैक्षिक योग्यता को लेकर भी शिकायत की गई है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या उचित दर की दुकान के लिए आवेदन करने वाले मृतक आश्रित के पास आवेदन की तिथि पर निर्धारित शैक्षिक योग्यता थी। शिकायती पत्र में कक्षा 10 की अंकतालिका सहित अन्य शैक्षिक दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि अंकतालिकाओं की सत्यता स्पष्ट हुए बिना आवंटन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। हालांकि, अंकतालिका के फर्जी होने का आरोप अभी शिकायत के स्तर पर है और इसकी पुष्टि संबंधित शिक्षा बोर्ड या सक्षम विभाग की जांच रिपोर्ट से ही हो सकेगी।

ग्रामीणों के अनुसार, 18 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत संख्या 40015926021749 और 40015926013804 के माध्यम से आवेदक की कक्षा 10वीं एवं अन्य शैक्षिक अंकतालिकाओं की सत्यता की जांच कराने की मांग की गई थी।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित खाद्य निरीक्षक ने 17 अक्टूबर 2026 को प्रकरण जिला विद्यालय निरीक्षक को सत्यापन के लिए अग्रसारित कर शिकायत का निस्तारण कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि किसी प्रकरण को दूसरे विभाग के पास सत्यापन के लिए भेज देना अपने आप में अंकतालिका के वास्तविक होने का प्रमाण नहीं है। उनका सवाल है कि जब तक संबंधित शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक शिकायत को बंद करने का औचित्य क्या था।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से संबंधित अंकतालिकाओं का सत्यापन कराया जाए और जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। यदि जांच में कोई अंकतालिका फर्जी या कूटरचित पाई जाती है अथवा आवेदक निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया और सत्यापन रिपोर्ट मिलने से पहले प्रकरण बंद किए जाने के औचित्य की भी जांच कराई जाए।

शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने मांग की है कि राशन दुकान के आवंटन की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि कहीं किसी अधिकारी या कर्मचारी ने नियमों की अनदेखी अथवा किसी आवेदक को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास तो नहीं किया। यदि जांच में पक्षपात, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को केवल राशन की दुकान के आवंटन तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इससे पूरे गांव के राशन उपभोक्ताओं की सुविधा, पात्र लाभार्थियों के अधिकार और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता का सवाल जुड़ा है। गांव के लोगों को नियमित राशन प्राप्त करने के लिए दूसरे गांव तक जाना पड़ रहा है, जबकि इस समस्या का शीघ्र समाधान किया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने मांग की है कि राशन दुकान के आवंटन से संबंधित सभी अभिलेखों की जांच कराई जाए, मृतक आश्रित की पात्रता का परीक्षण किया जाए और शैक्षिक अंकतालिकाओं का संबंधित शिक्षा बोर्ड से सत्यापन कराया जाए। इसके साथ ही आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया की जांच कर ग्रामीणों को दूसरे गांव जाने की समस्या से राहत दिलाने के लिए नियमानुसार शीघ्र उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

शिकायती पत्र पर रत्ना देवी, पलक, पूनम, सुशील कुमार, प्रेमपाल, रामसेवक, दीपक, संदीप, राशी, रानी देवी, रजनीश कुमार, दिनेश कुमार, राजीव कुमार, अनिल कुमार, सोनू, अजय कुमार, टनेश, बृजेश कुमार, बबलू, अनूप यादव, संतोष, अवनीश कुमार, अनुज कुमार, पुलेन्द्र कुमार, वीरेंद्र, प्रेमचंद्र, रामऔतार, राजीव, सतीश, रिंकू और विमल कुमार समेत करीब तीन दर्जन ग्रामीणों के हस्ताक्षर बताए गए हैं।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की शीघ्र निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई और राशन वितरण की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे सक्षम अधिकारियों के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग ग्रामीणों की शिकायत पर क्या कदम उठाता है और राशन दुकान के आवंटन से जुड़े सवालों पर जांच के बाद क्या स्थिति स्पष्ट होती है।