लखनऊ। रंगमंच से लेकर टेलीविजन और डिजिटल मनोरंजन की दुनिया तक अपनी रचनात्मक प्रतिभा का सफर तय करने वाले निर्देशक विकास श्रीवास्तव का 29 अक्टूबर को निधन हो गया। उनके निधन की खबर से लखनऊ के रंगमंच और मुंबई की टेलीविजन इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों, निर्देशकों और कला प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई। लखनऊ की रंगमंचीय जमीन से अपने सफर की शुरुआत करने वाले विकास श्रीवास्तव ने मुंबई पहुंचकर छोटे पर्दे के कई चर्चित धारावाहिकों में निर्देशन और सहायक निर्देशन की जिम्मेदारी निभाई। उनका करियर संघर्ष, अनुभव और लगातार सीखते रहने की एक ऐसी यात्रा रहा, जिसमें रंगमंच से लेकर राष्ट्रीय टेलीविजन और ओटीटी के नए प्रारूप तक का विस्तार दिखाई देता है।
विकास श्रीवास्तव का लखनऊ से विशेष जुड़ाव रहा। उन्होंने अपने रचनात्मक जीवन की शुरुआत लखनऊ में रंगमंच से की थी। मंच पर काम करते हुए उन्होंने अभिनय, दृश्य संयोजन, संवाद, कलाकारों के साथ काम करने और प्रस्तुति की बारीकियों को समझा। रंगमंच ने उन्हें कहानी को देखने और उसे दृश्य माध्यम में बदलने की दृष्टि दी। इसी अनुभव को साथ लेकर वह मुंबई पहुंचे और टेलीविजन की दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए काम शुरू किया। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने अपना करियर रचनात्मक क्षेत्र में बनाया।
उनके पेशेवर सफर की शुरुआत सहायक निर्देशक के रूप में हुई। बालाजी टेलीफिल्म्स के लोकप्रिय धारावाहिक 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया। इसके बाद 'शक्ति', 'सुपरस्टार', 'दर्शन दो भगवान' और 'आरती' जैसे धारावाहिकों से जुड़े। आगे चलकर उन्होंने एसोसिएट डायरेक्टर और सेकंड यूनिट डायरेक्टर के रूप में कई बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ काम किया। यह वह दौर था, जब भारतीय टेलीविजन तेजी से लोकप्रिय हो रहा था और धारावाहिकों के निर्माण में निर्देशन की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही थी।
विकास श्रीवास्तव के कार्य अनुभव में हिंदी टेलीविजन के कई चर्चित धारावाहिक शामिल रहे। उन्होंने 'कुसुम', 'क्या हादसा क्या हकीकत', 'कभी आए न जुदाई', 'नाम गुम जाएगा', 'करीना करीना', 'चाचा चौधरी', 'आक्रोश' और 'एक थी राजकुमारी' जैसे धारावाहिकों में एसोसिएट डायरेक्टर के रूप में काम किया। इसके अलावा 'धूम मचाओ धूम' में भी निर्देशन टीम का हिस्सा रहे। जी टीवी के 'हिटलर दीदी', 'छोटी बहू', 'रब से सोना इश्क' और 'जमाई राजा' तथा स्टार प्लस के 'मेरे अंगने में' जैसे धारावाहिकों में सेकंड यूनिट डायरेक्टर के रूप में उनकी भूमिका रही।
निर्देशक के रूप में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। 'इस प्यार को क्या नाम दूं' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक के निर्देशन से वह जुड़े रहे। 'कैसा है ये रिश्ता अनजाना', 'चुटकी चुटंकी' और 'बाल कृष्ण' का निर्देशन किया। इसके अलावा 'सावधान इंडिया' के लिए भी उन्होंने निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली। 'टूट के दिल मेरा' में उन्होंने सेकंड यूनिट डायरेक्टर के रूप में काम किया। इन परियोजनाओं के जरिए उन्होंने पारिवारिक धारावाहिकों से लेकर क्राइम आधारित कार्यक्रमों और धार्मिक विषयों तक अलग-अलग विधाओं में काम किया।
उनकी रचनात्मक यात्रा केवल हिंदी टेलीविजन तक सीमित नहीं रही। ओडिशा के क्षेत्रीय मनोरंजन जगत में भी उन्होंने महत्वपूर्ण काम किया। 'सिंदूर बिंदु' और 'तो पाई मु' जैसे धारावाहिकों में क्रिएटिव डायरेक्टर की जिम्मेदारी निभाई। 'मो जे जे मां', 'दुर्गा' और 'जे जे मां' का निर्देशन किया। इसके अलावा 'मोहे दे बोली दे तोहे दे कड़ा' और 'बहू हमारी एनआरआई' जैसे धारावाहिकों से भी जुड़े रहे। क्षेत्रीय भाषाओं के टेलीविजन कार्यक्रमों में उनका योगदान उनके व्यापक कार्यक्षेत्र को दर्शाता है।
फिल्म और डॉक्यूमेंट्री के क्षेत्र में भी उन्होंने काम किया। 'ये इश्क नहीं' और 'धमकी' फिल्मों में एसोसिएट डायरेक्टर के रूप में जुड़े रहे, जबकि 'लायक नहीं नालायक हूं' का निर्देशन किया। लखनऊ दूरदर्शन के लिए 'ब्रह्मावर्त' नामक डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन भी उनके कार्यों में शामिल है। बदलते समय के साथ उन्होंने डिजिटल मनोरंजन के नए प्रारूप को भी अपनाया। जियो हॉटस्टार के लिए 'मिट्टी का शेर' और 'स्टार्टअप जुनून-रिंकी बनी बाजीगर' जैसी वर्टिकल ड्रामा सीरीज का निर्देशन किया। इस तरह उनका अनुभव पारंपरिक टेलीविजन से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक फैला हुआ था।
कलाकारों और रंगकर्मियों ने जताया शोक
विकास श्रीवास्तव के निधन पर लखनऊ के रंगमंच और कला जगत से जुड़े लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। रंगकर्मी मुकेश वर्मा, कलाकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के सचिव विनोद मिश्रा, रंगकर्मी कपिल तिलहरी, संगम बहुगुणा और जगमोहन रावत ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए याद किया।
रंगकर्मी मुकेश वर्मा ने कहा कि विकास श्रीवास्तव का लखनऊ के रंगमंच से जुड़ाव रहा और उन्होंने इसी धरती से अपने रचनात्मक सफर की शुरुआत की थी। रंगमंच से निकलकर मुंबई की टेलीविजन इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना उनके समर्पण और मेहनत को दर्शाता है। उनका जाना उन सभी लोगों के लिए दुखद है, जो रंगमंच और टेलीविजन के माध्यम से समाज और दर्शकों से जुड़ने का काम करते हैं।
कलाकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के सचिव विनोद मिश्रा, कपिल तिलहरी, संगम बहुगुणा और जगमोहन रावत ने भी उनके साथ जुड़ी यादों को साझा करते हुए कहा कि विकास श्रीवास्तव का रचनात्मक योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा। उन्होंने एक ऐसे दौर में टेलीविजन की दुनिया में काम किया, जब धारावाहिक निर्माण में टीमवर्क, अनुशासन और अनुभव की अहम भूमिका थी।
विकास श्रीवास्तव का सफर लखनऊ के रंगमंच से शुरू होकर मुंबई की टेलीविजन इंडस्ट्री और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंचा। उनके काम की फेहरिस्त बताती है कि उन्होंने मनोरंजन के बदलते माध्यमों के साथ खुद को लगातार जोड़े रखा। उनके निधन से रंगमंच और टेलीविजन निर्देशन के क्षेत्र ने एक अनुभवी रचनात्मक व्यक्तित्व खो दिया है। वह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जिन धारावाहिकों, फिल्मों और प्रस्तुतियों से वह जुड़े रहे, उनमें उनका काम उनकी याद को जीवित रखेगा।

