क्रॉसर: परासन मौरंग खदान को लेकर विवाद, किसानों ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार; अवैध खनन और दबंगई के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग
जालौन। जनपद में मौरंग खनन को लेकर किसानों और खनन कारोबारियों के बीच विवाद के आरोप सामने आए हैं। परासन मौरंग खदान के आसपास नदी किनारे सब्जियों की खेती करने वाले किसानों का आरोप है कि खनन गतिविधियों के चलते उनकी फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। किसानों ने खनन का विरोध करने पर मारपीट किए जाने और प्रशासन से शिकायत के बावजूद न्याय नहीं मिलने की बात भी कही है। इन आरोपों ने खनन गतिविधियों की निगरानी और किसानों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
किसानों के अनुसार, वे नदी किनारे की जमीन पर सब्जियों की खेती करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनका आरोप है कि परासन मौरंग खदान क्षेत्र में पोकलैंड मशीनों के जरिए रातभर खनन किया जाता है। इससे खेती और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। किसानों का कहना है कि फसल बर्बाद होने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
किसानों ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने कथित अवैध खनन और अपनी फसलों को हो रहे नुकसान का विरोध किया, तो उनके साथ मारपीट की गई। किसानों का कहना है कि खेती बचाने के लिए आवाज उठाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। हालांकि, मारपीट की घटना और अवैध खनन के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
पीड़ित किसानों का कहना है कि वे अपनी शिकायत लेकर जिलाधिकारी के पास भी पहुंचे, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली खनन कारोबारियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इन आरोपों के संबंध में प्रशासन की ओर से की गई जांच अथवा कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है।
मेसर्स सलोनी इंटरप्राइजेज की भूमिका की जांच की मांग
विवाद के केंद्र में बताई जा रही परासन मौरंग खदान और मेसर्स सलोनी इंटरप्राइजेज की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि खदान की स्वीकृत सीमाओं, खनन की अनुमति, मशीनों के इस्तेमाल, खनन के समय और पर्यावरणीय नियमों के पालन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में अवैध खनन, फसल क्षति या मारपीट के आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

