उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे के बाद घटनास्थल तक पहुंचना बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पहाड़ी इलाका बेहद दुर्गम होने के कारण जवानों को शवों को सड़क तक पहुंचाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। करीब 12 किलोमीटर लंबे कठिन पहाड़ी रास्ते से शवों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

हादसे के बाद शुक्रवार रात अंधेरा और दुर्गम रास्ता राहत अभियान में बड़ी बाधा बन गए। खराब परिस्थितियों के कारण रात में शवों को घटनास्थल से सड़क तक नहीं पहुंचाया जा सका। पहाड़ी क्षेत्र में सीमित पहुंच और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के चलते बचाव दलों को अभियान रोकना पड़ा। इसके बाद शनिवार सुबह दोबारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी की गई।

शनिवार सुबह सेना समेत विभिन्न सुरक्षा बलों के जवानों ने एक बार फिर मोर्चा संभाला और शवों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। जवान दुर्गम रास्तों से होते हुए शवों को सड़क तक लाने में जुटे हैं। इस अभियान में सुरक्षा बलों को कठिन चढ़ाई और पहाड़ी रास्तों की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। राहत एवं बचाव टीमें पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ रही हैं।

फिलहाल घटनास्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और जवानों का मुख्य लक्ष्य सभी शवों को सड़क तक पहुंचाना है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अभियान में समय लग रहा है। प्रशासन और सुरक्षा बलों की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी और बचाव अभियान की आगे की स्थिति आधिकारिक अपडेट के बाद स्पष्ट होगी।