लखनऊ। आवासीय संपत्तियों की मांग को देखते हुए उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद करीब 20 साल बाद फिर से मकान बनाने की योजना शुरू करने जा रहा है। सुल्तानपुर रोड पर शहीद पथ के पास स्थित अवध विहार योजना में पहले चरण में 94 मकान बनाए जाएंगे। इसके साथ ही 180 व्यावसायिक भूखंडों के पंजीकरण की भी तैयारी है। परिषद ने मकान निर्माण योजना के लिए रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) से मंजूरी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

परिषद की ओर से प्रस्तावित योजना का अनुमोदन आगामी बोर्ड बैठक में कराया जाएगा। बैठक दिवाली से पहले या उसके बाद होने की संभावना है। मंजूरी मिलने के बाद मकानों और व्यावसायिक भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

आवास विकास परिषद ने रायबरेली रोड पर करीब दो दशक पहले वृंदावन योजना में मकान बनाए थे। इसके बाद परिषद ने अवध विहार योजना विकसित की, जहां भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी और नंदिनी नाम से बहुमंजिला आवासीय योजनाएं शुरू की गईं। उस समय भूमि बैंक की कमी के कारण मकान और भूखंडों की नई योजना नहीं लाई जा सकी थी।

बहुमंजिला फ्लैटों की अपेक्षाकृत कम मांग के कारण परिषद के करीब तीन हजार फ्लैट लंबे समय तक खाली रहे। बाद में इन्हें छूट देकर बेचना पड़ा। दूसरी ओर, भूखंडों की मांग बनी रही। परिषद ने अपनी पुरानी योजनाओं में खाली मकान और भूखंड नीलामी के जरिये बेचे, जिससे बेहतर कीमत मिली। इसी मांग को देखते हुए अब अवध विहार योजना में मकान और व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। करीब चार साल पहले यहां कुछ भूखंडों की पेशकश की गई थी, लेकिन मकान बनाने की योजना नहीं थी।

अवध विहार योजना के पहले चरण में 94 सेमीफिनिश्ड एक मंजिला मकान बनाए जाने की योजना है। प्रस्तावित मकानों की कीमत उनके आकार के अनुसार अलग-अलग रखी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 2160 वर्ग फीट आकार के 34 मकानों की कीमत 42.50 लाख रुपये, 2394 वर्ग फीट के 32 मकानों की कीमत 44.25 लाख रुपये और 9760 वर्ग फीट के 28 मकानों की कीमत 80 लाख रुपये प्रस्तावित है।

योजना में जमीन की दर 41,500 रुपये प्रति वर्गमीटर बताई गई है। मकान स्ववित्तपोषित योजना के तहत बनाए जाएंगे, इसलिए आवंटियों को किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी। परिषद अगले चरण में छोटे और बड़े आकार के अन्य मकान भी शामिल कर सकती है।

इसके अलावा, योजना में 180 व्यावसायिक भूखंडों का पंजीकरण शुरू करने की तैयारी है। इनकी कीमत 83,000 रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित बताई गई है। पंजीकरण की तारीख और आवेदन से जुड़ी विस्तृत शर्तें आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होंगी।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) भी भूखंडों की मांग को देखते हुए पांच आवासीय योजनाओं पर काम कर रहा है। इनमें सीतापुर रोड की नैमिष नगर योजना और आगरा एक्सप्रेसवे के पास प्रस्तावित वरुण विहार योजना प्रमुख हैं।

वरुण विहार योजना के पहले चरण में करीब 4500 भूखंडों के लिए लगभग 35 हजार आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। अगले चरण में दो हजार और भूखंड लाने की तैयारी है। इसके बाद आईटी सिटी, वेलनेस सिटी और वशिष्ठपुरम योजनाओं में भी पंजीकरण शुरू करने की योजना है। एलडीए की ओर से 280 वर्गमीटर आकार के छह और 72 वर्गमीटर के 174 व्यावसायिक भूखंड भी उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई

दूसरी ओर, एलडीए देवपुर पारा स्थित अटल आवासीय योजना के एमआईजी श्रेणी के फ्लैटों का कब्जा दिवाली तक आवंटियों को देना शुरू करने की तैयारी में है। इसके साथ ही एलआईजी-1 श्रेणी के 208 फ्लैटों की लॉटरी भी इसी अवधि में कराने का लक्ष्य रखा गया है।

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बुधवार को अटल आवासीय योजना, नादरगंज औद्योगिक क्षेत्र और वरुण विहार योजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण और विकास कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

अटल आवासीय योजना में बिजली के खंभों को स्थानांतरित करने, पार्क और ग्रीन बेल्ट विकसित करने, सड़कों का काम पूरा करने तथा अग्नि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने का काम जारी है। रजनीगंधा टावर के शेष कार्य 15 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। एमआईजी फ्लैटों के पास पार्किंग की सुविधा बढ़ाने के लिए मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण भी कराया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान नादरगंज औद्योगिक क्षेत्र में कान्हा गोशाला से अमौसी फ्लाईओवर तक सड़क चौड़ीकरण, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग और नाला निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। नादरगंज से टीएस मिश्रा विश्वविद्यालय तक सड़क को 18 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। सड़क किनारे इंटरलॉकिंग और गहरे नाले का निर्माण भी जारी है।

सड़क चौड़ीकरण के लिए कान्हा उपवन का गेट और बाउंड्री हटाकर बाद में दोबारा बनाने की योजना है। इसके साथ ही कपिला गोशाला की बाउंड्री का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए।

वरुण विहार योजना में भूमि समतलीकरण, मिट्टी की पटाई, सड़क की सफाई और भूखंडों के विकास कार्यों का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों से जमीन की सतह करीब एक फुट ऊंची रखने और जलभराव रोकने के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। योजना क्षेत्र में लगभग डेढ़ किलोमीटर सड़क की सफाई और भूखंडों के विकास कार्यों में तेजी लाने के साथ नियमित निगरानी के लिए साप्ताहिक ड्यूटी तय करने के निर्देश भी दिए गए।