डीआरआई और एटीएस की संयुक्त छापेमारी में अवैध लैब का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार; दिल्ली और मुंबई तक फैला था सप्लाई नेटवर्क

जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार का बड़ा मामला सामने आया है। उरई में एक खेत के अंदर बनाई गई ड्रग्स लैब पर राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) और आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान करीब 5 करोड़ रुपये कीमत की मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

जानकारी के मुताबिक, खेत में गुप्त रूप से लैब बनाकर सिंथेटिक ड्रग्स तैयार की जा रही थी। जांच में सामने आया कि यहां तैयार होने वाली नशीली दवाओं की सप्लाई दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक की जाती थी। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुट गई हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस अवैध लैब में महज तीन दिनों के भीतर करीब 20 किलोग्राम मेफेड्रोन तैयार करने की क्षमता थी। तैयार ड्रग्स की कीमत लगभग 30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। इस हिसाब से नशे के इस अवैध कारोबार का दायरा करोड़ों रुपये तक पहुंच रहा था।

संयुक्त छापेमारी के दौरान एटीएस ने संतोष और हेमेंद्र कुशवाहा नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं, ताकि ड्रग्स निर्माण में शामिल अन्य लोगों, कच्चे माल की आपूर्ति और खरीद-बिक्री के नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

मामले में खेत के अंदर लंबे समय से कथित तौर पर चल रही ड्रग्स लैब को लेकर स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पुलिस की संलिप्तता या लापरवाही को लेकर अभी किसी आधिकारिक निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।

डीआरआई और एटीएस की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अवैध कारोबार के तार किन-किन शहरों और लोगों से जुड़े हैं।