- दो अरब दलों को 19 सीटें मिलने का दावा
- नेतन्याहू ने चुनाव में वोट चोरी के आरोप लगाए
इजरायल। इजरायल की राजनीति में सरकार गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। चुनावी समीकरणों के बीच अरब नेतृत्व वाली दो राजनीतिक पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन दोनों दलों के कुल 19 सीटें जीतने के दावे के बाद सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच समर्थन जुटाने की चुनौती बढ़ गई है। वहीं, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चुनाव में कथित अनियमितताओं को लेकर वोट चोरी के आरोप लगाए हैं।
इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में यदि कोई प्रमुख गठबंधन बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंचता है, तो अरब दलों का समर्थन सरकार गठन के समीकरण बदल सकता है। दोनों अरब पार्टियों की कुल 19 सीटों का दावा सही साबित होने पर उनकी राजनीतिक अहमियत बढ़ सकती है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी की ओर से चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोपों के बीच चुनाव परिणामों और मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, वोट चोरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के अंतिम निष्कर्षों की जानकारी सामने आना आवश्यक है।
सरकार गठन के लिए विपक्षी दलों को भी विभिन्न राजनीतिक समूहों का समर्थन जुटाना होगा। अरब पार्टियों के साथ संभावित सहयोग को लेकर राजनीतिक मतभेद इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सीटों की संख्या के साथ-साथ दलों के बीच सहमति भी महत्वपूर्ण होगी।
इजरायल में सरकार गठन की तस्वीर अंतिम चुनावी परिणामों और गठबंधन वार्ताओं के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि किसी भी गठबंधन को 61 सीटों का समर्थन नहीं मिलता है, तो राजनीतिक गतिरोध बढ़ सकता है। फिलहाल अरब पार्टियों की संभावित भूमिका और नेतन्याहू के आरोपों ने इजरायल की राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

