शरद कटियार
कुछ रिश्ते टूटकर भी बहुत कुछ सिखा जाते हैं, कुछ चेहरे बेनकाब होकर जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई समझा जाते हैं। विश्वास तोड़ने वालों से बदला लेने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि कर्म का न्याय और स्वभाव का परिणाम इंसान को एक दिन स्वयं अपनी सच्चाई से मिला देता है।
जीवन में सबसे गहरी चोट कोई शत्रु नहीं देता, बल्कि वह व्यक्ति देता है, जिस पर हमने आंखें बंद करके विश्वास किया होता है। जिसके सामने अपना हृदय खोल दिया, जिसे अपने सुख-दुख का साथी समझा, जिसके शब्दों को सच और जिसके वादों को अपना भविष्य मान लिया, जब वही व्यक्ति विश्वास तोड़ता है, तो दर्द केवल रिश्ते के टूटने का नहीं होता, बल्कि उस विश्वास के बिखरने का होता है, जिसे हमने बड़ी श्रद्धा से अपने भीतर स्थान दिया था।
धोखा देने वाला अक्सर यह समझता है कि उसने किसी को हराकर अपनी जीत सुनिश्चित कर ली। वह सोचता है कि छल से प्राप्त लाभ, झूठ से बचाई गई प्रतिष्ठा और विश्वासघात से हासिल की गई सफलता ही उसकी बुद्धिमानी है। लेकिन वह भूल जाता है कि इंसान दूसरों से कुछ समय तक अपनी सच्चाई छिपा सकता है, स्वयं से नहीं। उसके कर्म, उसका स्वभाव और उसके चुनाव धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व का वास्तविक चेहरा सामने ले आते हैं।
इसलिए विश्वास तोड़ने वालों से बदला मत लो। अपने भीतर की शांति को उनके व्यवहार की आग में मत जलाओ।
जिसने तुम्हारे साथ छल किया, उसे उसी की भाषा में उत्तर देना जरूरी नहीं। जिसने तुम्हारी सरलता को कमजोरी समझा, उसके सामने स्वयं को कठोर सिद्ध करना जरूरी नहीं। जिसने तुम्हारे प्रेम, समर्पण और विश्वास का अनुचित लाभ उठाया, उसके पीछे अपना जीवन और अपनी ऊर्जा नष्ट करना भी जरूरी नहीं।
कभी-कभी सबसे बड़ा उत्तर मौन होता है। सबसे बड़ी शक्ति दूरी बना लेना होती है। और सबसे बड़ी जीत यह होती है कि किसी के गलत व्यवहार के बाद भी तुम अपने भीतर की अच्छाई को मरने नहीं देते।
शिव केवल एक नाम नहीं, बल्कि सत्य, धैर्य, करुणा और वैराग्य की अनुभूति हैं। शिव का स्मरण हमें सिखाता है कि जीवन में विष भी मिले, तो विवेक नहीं खोना चाहिए। अपमान मिले, तो आत्मसम्मान नहीं छोड़ना चाहिए। विश्वास टूटे, तो अपने भीतर की पवित्रता को समाप्त नहीं होने देना चाहिए।
विश्वास शिव का नाम है, और शिव सत्य, सुंदर तथा कल्याण के प्रतीक हैं।
विश्वास वह पवित्र भाव है, जिसमें मनुष्य बिना किसी भय के अपना मन किसी दूसरे के सामने रख देता है। जब यही विश्वास छल का शिकार होता है, तब मन में क्रोध, प्रतिशोध और प्रश्न जन्म लेते हैं। लेकिन शिव का मार्ग हमें यह समझाता है कि हर पीड़ा का उत्तर हिंसा नहीं, हर अपमान का उत्तर प्रतिशोध नहीं और हर धोखे का उत्तर धोखा नहीं होता।
कभी-कभी जीवन हमें किसी व्यक्ति से दूर करके उस सत्य के निकट ले जाता है, जिसे हम मोह के कारण देख नहीं पा रहे थे।
जो व्यक्ति बार-बार विश्वास तोड़ता है, जो संबंधों को अपने लाभ का साधन समझता है और जो दूसरों की भावनाओं को महत्व नहीं देता, उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती उसका अपना स्वभाव होता है।
झूठ बोलने वाले को हर संबंध में संदेह का सामना करना पड़ता है। छल करने वाला सच्चे विश्वास की कीमत देर से समझता है। स्वार्थ में जीने वाला अक्सर उन रिश्तों को खो देता है, जिन्हें धन, पद या चतुराई से वापस नहीं पाया जा सकता।
यह जरूरी नहीं कि हर गलत व्यक्ति को तुरंत दंड मिले या हर विश्वासघाती के सामने उसके कर्मों का परिणाम उसी रूप में आए, जिस रूप में उसने दूसरों को पीड़ा दी थी। लेकिन इतना सत्य है कि उसके चुनाव उसके जीवन, संबंधों और प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं।
इसीलिए दूसरों के पतन की प्रतीक्षा करने के बजाय अपने उत्थान पर ध्यान देना चाहिए। न्याय की आशा रखनी चाहिए, पर अपने जीवन को प्रतिशोध का बंदी नहीं बनाना चाहिये।
क्षमा करने का अर्थ यह नहीं कि जिसने तुम्हें चोट पहुंचाई, उसे दोबारा वही अधिकार दे दिया जाए। क्षमा का अर्थ यह भी नहीं कि अन्याय को स्वीकार कर लिया जाए या अपनी गरिमा को बार-बार कुचलने दिया जाए।
क्षमा का वास्तविक अर्थ है अपने हृदय को घृणा के बोझ से मुक्त करना, जबकि अपने विवेक को जागृत रखना।
जिसने विश्वास तोड़ा, उससे दूरी बनाना उचित हो सकता है। जहां आवश्यकता हो, वहां अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना भी जरूरी है। लेकिन अपने भीतर बदले की आग पालकर स्वयं को दुखी करते रहना उस व्यक्ति को अपने जीवन पर अनावश्यक अधिकार देने जैसा है।
अपने मन को शांत रखो, अपनी सीमाएं स्पष्ट करो और अपने रास्ते पर आगे बढ़ो।
जीवन बहुत छोटा है। इसे उन लोगों के पीछे व्यर्थ नहीं करना चाहिए, जिन्होंने हमारी भावनाओं का सम्मान नहीं किया। जो चले गए, उन्हें रोकने के लिए अपने आत्मसम्मान को मत गिराओ। जो धोखा दे गए, उनके सामने अपनी सच्चाई साबित करने के लिए स्वयं को मत तोड़ो।
तुम्हारा सत्य तुम्हारी सबसे बड़ी पूंजी है। तुम्हारा चरित्र तुम्हारी असली पहचान है। तुम्हारी शांति तुम्हारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
महादेव पर विश्वास रखो, लेकिन अपने कर्म और विवेक का साथ कभी मत छोड़ो। समय के साथ परिस्थितियां बदलती हैं, चेहरे बदलते हैं और रिश्तों का अर्थ भी बदल जाता है। जो आज तुम्हारी सरलता को कमजोरी समझ रहा है, उसे भविष्य में तुम्हारी अनुपस्थिति का महत्व समझ आए या न आए, यह उसके जीवन का विषय है; तुम्हारा काम अपने जीवन को सुंदर बनाना है।
याद रखना, विश्वास तोड़ने वाले से बदला लेना आवश्यक नहीं। अपने विश्वास को फिर से सही दिशा देना आवश्यक है।
क्योंकि शिव का मार्ग किसी के विनाश की कामना करना नहीं, अपने भीतर के अंधकार को मिटाना है। सत्य का मार्ग किसी को गिराने की जिद नहीं, स्वयं को गिरने से बचाने का संकल्प है।
और जब मन में पीड़ा हो, आंखों में नमी हो तथा दुनिया की नीयत पर प्रश्न उठ रहे हों, तब केवल इतना याद रखना,जिसने धोखा दिया, उसे उसके कर्मों के साथ छोड़ दो। जिसने विश्वास तोड़ा, उससे अपनी राह अलग कर लो। अपने हृदय में सत्य, अपने व्यवहार में सुंदरता और अपने जीवन में शिव का स्मरण बनाए रखो।
क्योंकि अंततः मनुष्य की सबसे बड़ी जीत किसी दूसरे को हराना नहीं, बल्कि अपने भीतर की शांति को बचाए रखना है।

