नई दिल्ली। कांग्रेस की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि रैली की तारीख से दिवाली के त्योहार और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के साथ व्यापारियों की ओर से भी रैली की तारीख बदलने की मांग उठाई गई है। दूसरी ओर, कांग्रेस इस रैली के जरिए कथित वोट चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। ऐसे में आयोजन की तारीख को लेकर सियासी टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
VHP ने कांग्रेस पर साधा निशाना: विश्व हिंदू परिषद ने रैली की तारीख पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस से हिंदू त्योहारों और कारोबार को प्रभावित करने वाले कार्यक्रमों से बचने की अपील की है। संगठन का कहना है कि दिवाली के आसपास बाजारों में खरीदारी और व्यापारिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में बड़े राजनीतिक आयोजन से लोगों की आवाजाही और कारोबार पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है। VHP ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर सवाल उठाते हुए रैली के आयोजन को लेकर पुनर्विचार करने की मांग की है। हालांकि, रैली से कारोबार को कितना नुकसान हो सकता है, यह आयोजन की व्यवस्था और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
व्यापारियों ने भी तारीख बदलने की मांग उठाई: रैली को लेकर व्यापारिक वर्ग की चिंताएं भी सामने आई हैं। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ती है और कारोबार के लिहाज से यह समय काफी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के कारण यातायात, बाजारों तक पहुंच और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से रैली की तारीख बदलने की मांग की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस व्यापारियों की चिंताओं और विभिन्न संगठनों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाती है और आयोजन को लेकर कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।
‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कांग्रेस का जोर: कांग्रेस नेता राहुल गांधी चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। प्रस्तावित रैली के जरिए कांग्रेस चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाने और इस मामले में कार्रवाई की मांग को प्रमुखता से सामने रखना चाहती है। पार्टी के लिए यह आयोजन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जबकि विरोध करने वाले संगठन इसकी तारीख और संभावित प्रभावों को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। फिलहाल, रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। आगे यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेस निर्धारित तारीख पर ही आयोजन करती है या व्यापारियों और अन्य संगठनों की मांगों को देखते हुए कोई बदलाव किया जाता है।

