ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट क्षमता वाले सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के विरोध में भड़की हिंसा के बाद रविवार को भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हालात पर काबू पाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की दो कंपनियां, यानी करीब 500 जवान, राज्य में भेजने का फैसला किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन जवानों को महाराष्ट्र के नवी मुंबई से भारतीय वायु सेना के विशेष परिवहन विमान के जरिए हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की कुछ इकाइयां पहले से तैनात हैं। परियोजना के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान पासीघाट में राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) के कार्यालय और पुलिस थाने में आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग, विधायक निनोंग एरिंग और ओनी पन्यांग के घरों में तोड़फोड़ की गई। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की जा रही है।
पासीघाट समेत कई इलाकों में पांच या अधिक लोगों के जमा होने पर रोक: हिंसा के बाद ईस्ट सियांग जिला प्रशासन ने पासीघाट, मेबो और रुकसिन क्षेत्रों में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक स्थान पर इकट्ठा होने, जुलूस निकालने और हथियार लेकर चलने पर पाबंदी लगाई गई है। प्रशासन ने सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने, हिंसा भड़काने तथा कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे तक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच रुक-रुककर झड़पें होती रहीं। इस दौरान भारी पथराव में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना सामने आई। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और प्रतिबंधात्मक आदेशों का पालन करने की अपील की है। सुरक्षा बलों की तैनाती का उद्देश्य हिंसा पर नियंत्रण पाने के साथ-साथ सरकारी संस्थानों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने आंदोलनकारी संगठनों से बातचीत की अपील की: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हिंसा पर चिंता जताते हुए प्रदर्शनकारी संगठनों से आंदोलन का हिंसक रास्ता छोड़कर बातचीत करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के दरवाजे चर्चा के लिए हमेशा खुले हैं और सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर अपनी चिंताएं रखने वाले संगठनों का स्वागत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को परियोजना के संभावित फायदे और नुकसान पर चर्चा करनी चाहिए तथा सरकार से सवाल पूछकर अपनी आशंकाओं का समाधान मांगना चाहिए। परियोजना का विरोध कर रहे आदि बाने केबांग यूनाइटेड, SUMP प्रभावित क्षेत्र युवा एसोसिएशन और सियांग स्वदेशी किसान मंच जैसे संगठनों का कहना है कि इतने बड़े बांध से सियांग नदी घाटी के पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है। उनका यह भी तर्क है कि परियोजना के कारण स्थानीय आदिवासी समुदायों को अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़नी पड़ सकती है। इन संगठनों की प्रमुख चिंताओं में विस्थापन, पारिस्थितिकी और स्थानीय लोगों की आजीविका पर पड़ने वाला संभावित प्रभाव शामिल है।
चीन के बांध को लेकर रणनीतिक चिंता, परियोजना पर सरकार का जोर: सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की दलील है कि यह परियोजना भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की जल सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। सरकार की चिंता तिब्बत में यारलुंग त्संगपो नदी पर चीन की ओर से विकसित की जा रही विशाल जलविद्युत परियोजना से भी जुड़ी है। यारलुंग त्संगपो नदी भारत में प्रवेश करने के बाद सियांग के नाम से जानी जाती है। भारत को आशंका है कि चीन की ओर से नदी के प्रवाह में बड़े स्तर पर बदलाव किए जाने या अचानक पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले इलाकों पर असर पड़ सकता है। प्रस्तावित भारतीय परियोजना को इसी संदर्भ में जल भंडारण और संभावित बाढ़ के प्रभावों से निपटने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि, परियोजना के समर्थकों और विरोधियों के बीच पर्यावरणीय प्रभाव, विस्थापन तथा सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर मतभेद बने हुए हैं। फिलहाल, राज्य में प्राथमिकता हिंसा पर नियंत्रण पाने और संवाद के जरिए विवाद का समाधान तलाशने की है। परियोजना के भविष्य को लेकर अंतिम स्थिति सरकारी फैसलों, तकनीकी आकलन और स्थानीय समुदायों की चिंताओं के समाधान पर निर्भर करेगी।

