- महर्षि वाल्मीकि जयंती पर काव्यपाठ, विचार गोष्ठी और ‘साहित्य सारथी’ पुस्तक का विमोचन
फर्रुखाबाद। महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर संस्कार भारती की फर्रुखाबाद इकाई की ओर से जोगराज स्ट्रीट स्थित चीजी क्रेजी कैफे में कवि सम्मेलन एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें सामाजिक समरसता, महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन और वर्तमान समय में रामायण की प्रासंगिकता पर साहित्यकारों ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में काव्यपाठ के साथ साहित्यकार भारती मिश्रा की पुस्तक ‘साहित्य सारथी’ का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में कानपुर से आईं संस्कार भारती की प्रांतीय संयोजिका, साहित्य कला विभाग की तुषमुल मिश्रा, प्रांत उपाध्यक्ष रोचना बिश्नोई और साहित्यकार भारती मिश्रा सहित वरिष्ठ रचनाकार महेश पाल सिंह ‘उपकारी’ ने विचार गोष्ठी में अपने विचार रखे। वक्ताओं ने सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने, सांस्कृतिक चेतना के प्रसार और समाज में साहित्य की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रचनाएं और रामायण के जीवन मूल्य आज भी समाज को दिशा देने में प्रासंगिक है।
इस अवसर पर साहित्यकार भारती मिश्रा की पुस्तक ‘साहित्य सारथी’ का विमोचन किया गया। उपस्थित साहित्यकारों ने इसे रचनात्मक चिंतन और साहित्यिक अभिव्यक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
कवि सम्मेलन में वैभव सोमवंशी ‘सुभग’, उत्कर्ष अग्निहोत्री और कानपुर से आए राजेंद्र अवस्थी ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और भारतीय संस्कृति के विभिन्न पक्षों को अभिव्यक्ति दी। श्रोताओं ने रचनाओं की सराहना कर कवियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में संस्कार भारती की फर्रुखाबाद इकाई के अध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह और कार्यक्रम संयोजक अरविंद दीक्षित ने अतिथियों एवं रचनाकारों को सम्मानित किया। आयोजन के माध्यम से साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के साथ सामाजिक एकता तथा समरसता का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर संस्कार भारती के महामंत्री सुरेंद्र पाण्डेय, नवीन मिश्रा ‘नब्बू’, भूपेंद्र प्रताप सिंह, गुड्डी पंडित, आशुतोष, अर्पण शाक्य, चित्रा अग्निहोत्री, दीपक मिश्रा, दिनेश अवस्थी, रामऔतार शर्मा ‘इंदु’, राममोहन शुक्ला, हेमलता श्रीवास्तव, किरण त्रिवेदी, विष्णु दत्त शर्मा, दीप्ति यादव, आदेश अवस्थी और सुबोध शुक्ला सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का समापन महर्षि वाल्मीकि के साहित्यिक योगदान को स्मरण करने और भारतीय संस्कृति, साहित्यिक चेतना तथा सामाजिक एकता को मजबूत बनाने के संदेश के साथ हुआ।

