लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वन्यजीवों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े एक मामले का खुलासा हुआ है। यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए दुर्लभ पक्षियों की तस्करी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से सात दुर्लभ बाज (फाल्कन) बरामद किए गए हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 14 करोड़ रुपये बताई जा रही है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुंबई निवासी फिरोज मसर्रत खान के रूप में हुई है। इस कार्रवाई के बाद वन्यजीवों की अवैध तस्करी से जुड़े नेटवर्क को लेकर जांच तेज हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ को 30 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि मुंबई का रहने वाला एक व्यक्ति प्रतिबंधित पक्षियों को लेकर लखनऊ पहुंचने वाला है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ की टीम ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के अधिकारियों के साथ संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद टीम ने लखनऊ के मदेयगंज थाना क्षेत्र स्थित इरादतनगर मोहल्ले में एक मकान पर छापा मारा। शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे की गई इस कार्रवाई में आरोपी फिरोज मसर्रत खान को गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से सात दुर्लभ बाज, एक मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद हुआ। बरामद पक्षियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 14 करोड़ रुपये बताई गई है।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर वन्यजीवों और प्रतिबंधित पक्षियों की तस्करी करने वाले गिरोह से जुड़े होने की जानकारी दी। सामने आए तथ्यों के अनुसार, गिरोह के सदस्य उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर के जंगलों से पक्षियों को पकड़कर लाते थे। इसके बाद इन पक्षियों को मुंबई के रास्ते विदेशों में भेजने की व्यवस्था की जाती थी। जांच में दुबई, सऊदी अरब और बहरीन तक पक्षियों की आपूर्ति किए जाने की बात सामने आई है। इससे आशंका जताई जा रही है कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क कई राज्यों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक फैला हुआ हो सकता है। हालांकि, गिरोह में शामिल अन्य लोगों और तस्करी के पूरे नेटवर्क की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की इस संयुक्त कार्रवाई को वन्यजीवों की अवैध तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों को प्राकृतिक आवास से पकड़कर दूसरे देशों में भेजना वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे मामलों में तस्करी करने वाले नेटवर्क की पहचान करना और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
मामले में आरोपी फिरोज मसर्रत खान के खिलाफ लखनऊ के मदेयगंज थाने में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बरामद पक्षियों को लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। गिरफ्तारी के बाद मामले की आगे की कार्रवाई स्थानीय पुलिस को सौंपी गई है। अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटेंगी कि दुर्लभ बाज कहां से लाए गए थे, तस्करी के इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और विदेशों में इनके खरीदार कौन थे।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर वन्यजीवों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के गंभीर मुद्दे को सामने ला दिया है। सात दुर्लभ बाजों की बरामदगी और करीब 14 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत इस अवैध कारोबार के बड़े आर्थिक पहलू की ओर इशारा करती है। हालांकि, पूरे नेटवर्क और विदेशों तक इसकी पहुंच को लेकर जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं।

