लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में कथित धर्मांतरण और महिला डॉक्टरों के यौन शोषण से जुड़े मामले की जांच में एसटीएफ कई पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान इस्लामिक मेडिकोज समूह से जुड़े एक डॉक्टर डॉ. सैम अनीस को लेकर गंभीर दावा सामने आया है। जांच रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि डॉ. सैम ने कथित तौर पर 19 हिंदू युवतियों के साथ दुष्कर्म करने की बात पीड़िताओं के सामने स्वीकार की थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और मामले में कानूनी निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2006 से 2012 के बीच की घटनाओं और कथित धर्मांतरण के मामलों की गोपनीय तरीके से पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी संबंधित लोगों के संपर्क, गतिविधियों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर रही है। रिपोर्ट में सहारनपुर निवासी डॉ. सैम अनीस का नाम सामने आया है। दावा किया गया है कि उसने कुछ पीड़ित महिलाओं के सामने 19 हिंदू युवतियों के साथ दुष्कर्म करने की बात कही थी। इसके अलावा कई अन्य हिंदू महिलाओं के भी उसके संपर्क में होने की बात कही गई है। एसटीएफ इस पूरे पहलू की जांच कर रही है।

जांच रिपोर्ट में सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी), आगरा में इस्लामिक मेडिकोज नाम से एक समूह का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस समूह से संबंधित एक पुस्तक प्रकाशित हुई थी, जिसमें वर्ष 2012 से 2016 तक के बैच के मुस्लिम मेडिकल छात्रों का विवरण दर्ज था। इसमें रमीज, रिजवान मलिक, अदनान अंसारी और सैम अनीस को एक-दूसरे का मित्र बताया गया है। जांच एजेंसी इस समूह से जुड़े लोगों और कथित गतिविधियों के संबंध में जानकारी जुटा रही है।

रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर समीउद्दीन नायक से जुड़ा एक अन्य मामला भी दर्ज है। आरोप है कि उसने एक हिंदू जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर को प्रेम संबंध में फंसाया और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। इसके बाद दोनों का निकाह होने की बात कही गई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संबंधित डॉक्टर पहले भी निकाह कर चुका था। एसटीएफ इन आरोपों और उनसे जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

मामले की जांच गोपनीय तरीके से जारी है। जांच एजेंसी कथित धर्मांतरण, महिला डॉक्टरों के शोषण और संबंधित लोगों के आपसी संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की पुष्टि, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।