- अपहरण और जेल से रंगदारी मांगने के आरोप साबित नहीं कर सकी सीबीआई

- दूसरे हत्याकांड में उम्रकैद की सजा के चलते जेल में ही रहेंगे बबलू श्रीवास्तव।

लखनऊ। कुख्यात माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव को करीब 20 साल पुराने मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। सीबीआई की विशेष अदालत ने अपहरण और जेल के भीतर मोबाइल फोन के जरिए रंगदारी मांगने से जुड़े मामले में उन्हें साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।

अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई आरोपों को ठोस साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर सकी। जांच में भी आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषमुक्त कर दिया।

हालांकि, इस फैसले के बावजूद बबलू श्रीवास्तव की जेल से रिहाई नहीं होगी। वह कस्टम कलेक्टर एलडी अरोड़ा हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। ऐसे में पुराने मामले में बरी होने के बाद भी उन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा।

जांच में सामने आया कि यह मामला कोलकाता के होटल लिंगटन के मालिक के अपहरण की कथित साजिश से जुड़ा था। आरोप था कि बबलू श्रीवास्तव नैनी जेल में बंद रहते हुए भी अपने गिरोह को संचालित कर रहे थे। अदालत में अभियोजन पक्ष इन आरोपों को साबित नहीं कर सका।

बबलू श्रीवास्तव 1993 में प्रयागराज में तत्कालीन अतिरिक्त सीमा शुल्क कलेक्टर एलडी अरोड़ा की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए थे। इस मामले में उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार है। नवंबर 2024 में उनकी समयपूर्व रिहाई की दया याचिका भी खारिज हो चुकी है।