कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की जांच अब एक सेवानिवृत्त जज करेंगे। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि जांच समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। सरकार जांच के नतीजों को पश्चिम बंगाल विधानसभा के सामने पेश करने के साथ सार्वजनिक भी करेगी। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा पूर्वी मिदनापुर जिले के रामनगर में हादसे में जान गंवाने वाली कल्पना जाना के परिवार से मुलाकात के दौरान की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने शुरुआत में जांच के लिए किसी मौजूदा जज की नियुक्ति का अनुरोध किया था, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से इसमें कुछ कठिनाइयों की जानकारी दी गई। इसके बाद सरकार ने सेवानिवृत्त जज के नेतृत्व में जांच कराने का फैसला किया। इस हादसे में 17 लोगों की जान चली गई थी। घटना के बाद से ही पीड़ित परिवारों की ओर से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जांच समिति घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी और अपनी रिपोर्ट में आवश्यक सिफारिशें पेश करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाएगी और सरकार समिति की सिफारिशों पर कार्रवाई करेगी। अधिकारी के मुताबिक, जांच रिपोर्ट तीन महीने के भीतर तैयार होने की उम्मीद है। इसे विधानसभा में रखा जाएगा, ताकि जनप्रतिनिधियों को घटना की परिस्थितियों और जांच के निष्कर्षों की जानकारी मिल सके। इसके साथ ही रिपोर्ट को जनता के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जांच का उद्देश्य केवल हादसे की परिस्थितियों का पता लगाना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम सुझाना भी है। चोरबागान की घटना ने दुर्गा पूजा जैसे बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच समिति की रिपोर्ट से इन व्यवस्थाओं में संभावित खामियों का पता चलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और रोजगार में मदद देने की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के पात्र सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराने में सहायता करेगी। इसके लिए परिवारों से अपने बायोडाटा संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय में जमा करने को कहा गया है। अधिकारी ने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों की समस्याओं को समझने और उनकी जरूरतों के मुताबिक सहायता देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि वह राज्य के सभी 17 प्रभावित परिवारों से मिले और उनसे व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनकी परेशानियों के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री के अनुसार, परिवारों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि हादसे के बाद प्रभावित परिवारों को अपने जीवन को दोबारा व्यवस्थित करने में मदद मिल सके। सरकार की ओर से घोषित सहायता को पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
रामनगर में कल्पना जाना के परिवार से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने उनके बच्चों से भी बातचीत की और उनकी पढ़ाई को लेकर सहायता का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को शिक्षा जारी रखने में किसी तरह की परेशानी होती है, तो सरकार उनकी मदद करेगी। गौरतलब है कि कोलकाता के भीड़भाड़ वाले चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भीड़ को नियंत्रित करने के तरीकों पर सवाल उठे हैं। ऐसे आयोजनों में पर्याप्त प्रवेश और निकास मार्ग, भीड़ की आवाजाही की निगरानी, आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। अब सेवानिवृत्त जज के नेतृत्व में होने वाली जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि हादसे के समय किन परिस्थितियों के कारण भगदड़ हुई और सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी या नहीं। हालांकि, घटना के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे। राज्य सरकार ने तीन महीने में रिपोर्ट सार्वजनिक करने और सिफारिशों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

