लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 68500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का आक्रोश गुरुवार को एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। वर्षों से नियुक्ति की मांग कर रहे अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने नारेबाजी की और शंख तथा घंटियां बजाकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की। इस दौरान कई अभ्यर्थी भावुक हो गए और मंत्री के सामने जमीन पर लेटकर हाथ जोड़ते हुए नियुक्ति देने की गुहार लगाने लगे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाकर बसों में बैठाया।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना था कि वे पिछले कई वर्षों से नियुक्ति की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। अभ्यर्थियों ने 'ऐसी क्या मजबूरी है, आरक्षण की चोरी है' और 'पिछड़ा आयोग ने माना है, आरक्षण घोटाला है' जैसे नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसके कारण बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित रहना पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान उस समय माहौल और भावुक हो गया, जब कुछ अभ्यर्थी शिक्षा मंत्री के सामने जमीन पर लेट गए और हाथ जोड़कर अपनी मांग रखने लगे। उनका कहना था कि आठ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिल सकी है। परिवार की जिम्मेदारियां और आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन नियुक्ति को लेकर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की कि उनकी समस्या पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए।
पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर मौके से हटाए जाने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने पुलिस पर मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया। एक प्रदर्शनकारी ने रोते हुए दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने बस में बैठाने के बाद उन्हें लातों से मारा। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्रता की गई, गाली दी गई और कपड़े तक फाड़ दिए गए। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि पिटाई के बाद उसके पैर में गंभीर चोट आई है और वह पैर उठाने में असमर्थ है। उसने एक पुलिसकर्मी का नाम लेते हुए भी आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है और पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।




