- सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
नई दिल्ली।दीपावली के त्योहार पर हवाई टिकटों की कीमतों में भारी उछाल का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कई घरेलू हवाई मार्गों पर टिकटों का किराया सामान्य कीमत से सात गुना तक पहुंच गया है। इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया।
सोमवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव ने दलील दी कि हवाई किराए में असाधारण बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
इस पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर किराया ज्यादा है तो हवाई यात्रा मत कीजिए। अगला मामला।" इसके साथ ही पीठ ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की।
याचिका में दावा किया गया कि कई प्रमुख घरेलू मार्गों पर दीपावली से पहले किराया सामान्य स्तर से दो से सात गुना तक बढ़ गया है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली से कोलकाता का टिकट, जिसकी सामान्य कीमत 10 से 11 हजार रुपये बताई गई, 6 नवंबर की यात्रा के लिए 78,694 रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है।
याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार और विमानन नियामक से त्योहारों के दौरान हवाई किराए की अधिकतम सीमा तय करने के लिए व्यवस्था बनाने की मांग की है।
यह मामला एस. लक्ष्मीनारायणन बनाम भारत संघ से जुड़ा है। मूल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 16 नवंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित है। याचिका में त्योहारों और अधिक मांग वाले समय में किराया नियंत्रित करने के साथ घरेलू उड़ानों में मुफ्त सामान ले जाने की सीमा 15 किलोग्राम से बढ़ाकर 25 किलोग्राम करने की मांग भी की गई है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 1 नवंबर को भारतीय वायुयान नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। इन नियमों के तहत सार्वजनिक हित में असाधारण परिस्थितियों में केंद्र सरकार विमानन कंपनियों के किराए को लेकर निर्देश जारी कर सकेगी।


