नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस ने रैली के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। पार्टी ने वोट के अधिकार के मुद्दे को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देने की तैयारी के तहत विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश की। रैली में करीब 21 राजनीतिक दलों की भागीदारी ने विपक्षी एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया।

इस रैली में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी। खास बात यह रही कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों और राजनीतिक समझौते को लेकर अलग-अलग परिस्थितियां होने के बावजूद अखिलेश यादव मंच पर नजर आए। इसे विपक्षी एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, रैली में आम आदमी पार्टी की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े किए। इसके अलावा दक्षिण भारत के कुछ प्रमुख विपक्षी दल भी कार्यक्रम से दूर रहे। ऐसे में कांग्रेस की इस कोशिश के बावजूद विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पूरी तरह नजर नहीं आई।

कांग्रेस ने वोट के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखकर सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान तेज करने का संकेत दिया है। करीब 21 दलों की भागीदारी के जरिए साझा संदेश देने की कोशिश की गई, लेकिन अलग-अलग दलों की गैरमौजूदगी ने यह भी दिखाया कि विपक्षी एकता के सामने अभी कई राजनीतिक चुनौतियां मौजूद हैं।