वाराणसी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-BHU) का 15वां दीक्षांत समारोह शनिवार को स्वतंत्रता भवन में कुलगीत और वंदे मातरम की गूंज के साथ आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि और आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में तकनीक को चुनौती के बजाय अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने युवाओं से नई तकनीकों को अपनाने, लगातार सीखते रहने और बदलते समय के साथ खुद को तैयार करने का आह्वान किया।

समारोह के दौरान कुमार मंगलम बिड़ला ने संस्थान के 62 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 124 मेडल और पुरस्कार प्रदान किए। इनमें 97 गोल्ड मेडल, दो सिल्वर मेडल और 25 नकद पुरस्कार शामिल रहे। इसके अलावा विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल 2048 विद्यार्थियों को डिग्रियां और उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम में आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला को संस्थान की ओर से मानद डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि से सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन डॉ. कोटा हरिनारायण ने की। इस दौरान बीएचयू के कुलपति एवं बोर्ड के वाइस चेयरमैन प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, IIT-BHU के निदेशक प्रो. अमित पात्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

अपने संबोधन में कुमार मंगलम बिड़ला ने विद्यार्थियों को भविष्य की संभावनाओं के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के इस दौर में नई सोच, नवाचार और कौशल विकास बेहद महत्वपूर्ण हैं। दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह उपलब्धि उनके शैक्षणिक जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आई। संस्थान ने भी मेधावी विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।