लखनऊ: उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित केदारताल ट्रैक पर हुए भीषण हिमस्खलन ने लखनऊ के एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में लखनऊ के गायत्री पुरम निवासी दो सगी बहनों वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा की मौत हो गई। दोनों बहनों को ट्रेकिंग का बेहद शौक था और वे भारत के साथ-साथ नेपाल की कई पहाड़ियों और दुर्गम रास्तों पर ट्रेकिंग कर चुकी थीं। जिस रोमांच और जुनून के साथ दोनों बहनें पहाड़ों की यात्रा पर निकली थीं, वही यात्रा उनके जीवन की आखिरी यात्रा बन गई।
गुरुवार को दोनों बहनों के शव लखनऊ स्थित उनके घर पहुंचे तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। घर के बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के लोगों ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी। दोनों बेटियों को खोने का गम परिवार के लिए असहनीय हो गया। घर का माहौल गमगीन हो गया और हर आंख नम नजर आई।
जानकारी के मुताबिक, केदारताल ट्रैक पर हिमस्खलन की चपेट में आए पर्वतारोहियों में लखनऊ के गायत्री पुरम की रहने वाली वर्तिका वर्मा और उनकी छोटी बहन दीपिका वर्मा भी शामिल थीं। हादसे की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग बेहद परेशान हो गए। दोनों बहनों के भाई अतुल वर्मा मंगलवार को अपने परिजनों के साथ उनकी तलाश में उत्तरकाशी पहुंच गए थे। अतुल ने बताया कि ट्रेकिंग एजेंसी की ओर से परिवार को समय पर कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्हें सोशल मीडिया पर हादसे से जुड़ी खबर देखने के बाद अपनी बहनों के बारे में पता चला, जिसके बाद वह उत्तरकाशी के लिए रवाना हुए।
परिवार के मुताबिक, वर्तिका वर्मा फ्रीलांसर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में काम करती थीं, जबकि दीपिका वर्मा एक निजी कंपनी में ग्राफिक्स डिजाइनिंग का काम करती थीं। दोनों बहनों को घूमने और पहाड़ों पर ट्रेकिंग करने का काफी शौक था। वे अक्सर नई जगहों की यात्रा करती थीं और प्राकृतिक सुंदरता के बीच समय बिताना पसंद करती थीं। दोनों ने भारत और नेपाल के कई स्थानों पर ट्रेकिंग की थी।
अतुल वर्मा ने बताया कि करीब दो महीने पहले ही दोनों बहनें फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की ट्रेकिंग करके लौटी थीं। इसके अलावा लगभग एक साल पहले अतुल भी अपनी दोनों बहनों और दोस्तों के साथ उत्तरकाशी के केदारकांठा की यात्रा पर गए थे। परिवार के लिए दोनों बहनों का पहाड़ों से जुड़ाव उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि पहाड़ों की यही पसंद एक दिन परिवार के लिए इतना बड़ा दुख लेकर आएगी।
हिमस्खलन की इस घटना ने न केवल लखनऊ के गायत्री पुरम में रहने वाले परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि ट्रेकिंग और पर्वतारोहण से जुड़े लोगों को भी चिंतित कर दिया है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता, बर्फबारी और हिमस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में पर्वतीय अभियानों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, मौसम की जानकारी और ट्रेकिंग एजेंसियों की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
दोनों बहनों के शव घर पहुंचने के बाद परिवार और परिचितों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। जिन बेटियों के घर लौटने का इंतजार था, उनके शव देखकर परिजनों का दर्द छलक पड़ा। वर्तिका और दीपिका की असमय मौत से परिवार में ऐसा खालीपन पैदा हो गया है, जिसकी भरपाई कर पाना मुश्किल है।




