आईएएस ईशान प्रताप की पत्नी आईएसए अधिकारी रिया केजरीवाल ने फीता काटकर किया उद्घाटन

बाराबंकी

सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की सरजमीं देवा में विश्व प्रसिद्ध देवा मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। आस्था, सूफियाना परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश करने वाले इस ऐतिहासिक मेले का उद्घाटन जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह की पत्नी एवं आईएएस अधिकारी रिया केजरीवाल ने फीता काटकर किया। उद्घाटन समारोह में शांति, सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया। इस दौरान शेख मोहम्मद हसन गेट पर सफेद कबूतर उड़ाकर अमन-चैन का पैगाम दिया गया। देवा की पहचान केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में ही नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता और साझा सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में भी है। यहां लगने वाला ऐतिहासिक मेला हर वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों से जायरीन, श्रद्धालुओं और बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है। सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की शिक्षाओं से जुड़ा ‘जो रब है वही राम है’ का संदेश मेले की आत्मा माना जाता है। यही संदेश लोगों को धर्म, जाति और मजहब की सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानियत तथा आपसी प्रेम का रास्ता दिखाता है।

सफेद कबूतर उड़ाकर दिया शांति का संदेश

मेले के शुभारंभ अवसर पर शेख मोहम्मद हसन गेट पर सफेद कबूतर उड़ाए गए। यह प्रतीकात्मक आयोजन शांति, एकता और सद्भाव का संदेश देने वाला रहा। देवा की धरती से उठने वाला यह पैगाम आज के दौर में सामाजिक समरसता और आपसी विश्वास की अहमियत को रेखांकित करता है। ‘जो रब है वही राम है’ की भावना के साथ देवा मेला सदियों से विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों को एक मंच पर लाने की परंपरा को आगे बढ़ाता रहा है।

प्रशासनिक अधिकारियों और मेला कमेटी की रही मौजूदगी

उद्घाटन समारोह में उपजिलाधिकारी नवाबगंज एवं आईएएस अधिकारी गूंजीता अग्रवाल सहित मेला कमेटी के सदस्य मौजूद रहे। अधिकारियों और आयोजन समिति की उपस्थिति में मेले की शुरुआत हुई। देवा मेले का आकर्षण इसकी धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के साथ-साथ यहां मिलने वाली गंगा-जमुनी तहजीब की झलक भी है। मेले में आने वाले जायरीन और दर्शकों के लिए यह आयोजन केवल मनोरंजन या खरीदारी का अवसर नहीं, बल्कि सूफी संत की शिक्षाओं को करीब से महसूस करने का माध्यम भी है। देवा की सरजमीं से दिया जाने वाला प्रेम, सद्भाव और इंसानियत का संदेश इस ऐतिहासिक आयोजन को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। भव्य शुभारंभ के साथ ही देवा मेले में उत्सव का माहौल शुरू हो गया। अब आगामी दिनों में मेले की धार्मिक गतिविधियों, सांस्कृतिक आयोजनों और पारंपरिक आकर्षणों के बीच देवा की ऐतिहासिक विरासत एक बार फिर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेगी।