-इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल हुई स्पेशल अपील
वसीम अहमद और कुमारी गुलाबी समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने उठाया मुद्दा
आयोग से जवाब तलब
2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी) में शामिल किए जाने की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच तक पहुंच गई है। सिंगल बेंच द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील दाखिल की है। इस मामले में शिक्षामित्रों की ओर से दाखिल अपील पर अदालत ने संबंधित आयोग से जवाब मांगा है। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 2 नवंबर को निर्धारित की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वसीम अहमद और कुमारी गुलाबी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ स्पेशल अपील दाखिल की है। याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांग है कि शिक्षामित्रों को भी स्पेशल टीईटी में शामिल होने का अवसर दिया जाए। इस मांग को लेकर दाखिल अपील में पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्णय को डबल बेंच के समक्ष चुनौती दी गई है।
एकल पीठ के समक्ष दाखिल याचिका में वसीम अहमद और 220 अन्य शिक्षामित्रों ने विशेष टीईटी में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। कई शिक्षामित्र लगभग 26 वर्षों से विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा उनसे निर्वाचन, जनगणना, मतगणना, विद्यालय संचालन, परीक्षा ड्यूटी और विभागीय प्रशिक्षण जैसे कार्य भी लिए जाते रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि जब विशेष टीईटी में अन्य श्रेणियों के कार्यरत शिक्षकों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने वाले संविदा शिक्षकों को अवसर दिया जा रहा है, तो शिक्षामित्रों को इससे अलग रखना उचित नहीं है। उनका कहना था कि शिक्षामित्र भी लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं और उन्हें भी परीक्षा में बैठने का अवसर मिलना चाहिए।
इस मामले में न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने 1 अक्टूबर 2026 को वसीम अहमद और 220 अन्य की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने माना था कि नियमित सेवा में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षामित्रों की कानूनी स्थिति अलग-अलग है। विशेष टीईटी का आयोजन उन शिक्षकों को निर्धारित योग्यता पूरी करने का अवसर देने के लिए किया जा रहा है, जो पहले से नियमित रूप से सेवा में हैं और जिन पर बाद में टीईटी की अनिवार्यता लागू हुई है।
अदालत के अनुसार, विशेष टीईटी कोई भर्ती प्रक्रिया नहीं है और न ही इससे नियुक्ति का कोई स्वतः अधिकार मिलता है। इसी आधार पर शिक्षामित्रों को विशेष परीक्षा में शामिल करने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।
एकल पीठ के फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं ने विशेष अपील दाखिल की। 30 अक्टूबर को न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद सहित 221 शिक्षामित्रों की अपील पर सुनवाई की।
खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से हलफनामे के माध्यम से आगामी सामान्य शिक्षक पात्रता परीक्षा का प्रस्तावित कार्यक्रम मांगा है। अदालत ने वर्ष 2026 में प्रस्तावित दूसरी सामान्य टीईटी और अगले दो वर्षों की परीक्षाओं के कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देने को कहा है।
सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से बताया गया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक वर्ष कम से कम एक और प्राथमिकता के आधार पर दो टीईटी परीक्षाएं आयोजित की जानी हैं। इसी क्रम में हाईकोर्ट ने आयोग से परीक्षा कार्यक्रम स्पष्ट करने को कहा है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी। आयोग की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामे और सामान्य टीईटी के प्रस्तावित कार्यक्रम पर अदालत विचार करेगी।
इस मामले का परिणाम शिक्षामित्रों की विशेष टीईटी में शामिल होने की मांग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, फिलहाल डबल बेंच ने शिक्षामित्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।
