- किसानों के हित, बालिका शिक्षा और समाज सुधार के लिए समर्पित रहा जीवन
- सेवा और त्याग की मिसाल बने बाबूजी के आदर्श
शरद कटियार
कुछ व्यक्तित्व समय के साथ इतिहास के पन्नों में सिमट नहीं जाते, बल्कि अपने विचारों, संघर्षों और जनसेवा के कारण पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। बैरिस्टर बाबू बृजनंदन लाल कटियार ऐसे ही महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने जीवन को समाज के उत्थान, किसानों के अधिकारों, शिक्षा के प्रसार और सर्वसमाज के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनकी 134वीं जयंती पर उन्हें नमन करना केवल एक महापुरुष को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उन आदर्शों को याद करना है, जिनकी आज भी हमारे समाज को आवश्यकता है।
फर्रुखाबाद की धरती ने अनेक प्रतिभाओं और समाजसेवियों को जन्म दिया है। इसी धरती के बढ़पुर में जन्मे बाबू बृजनंदन लाल कटियार ने अपने कार्यों से ऐसी पहचान बनाई, जो आज भी सम्मान के साथ याद की जाती है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण था कि शिक्षा, साहस, दूरदृष्टि और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव किसी व्यक्ति को जनमानस के हृदय में अमर बना सकता है।
बाबू बृजनंदन लाल कटियार का व्यक्तित्व केवल एक बैरिस्टर या जनप्रतिनिधि तक सीमित नहीं था। वे किसानों की समस्याओं को समझते थे और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के पक्षधर थे। सहकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को इसी दृष्टि से याद किया जाता है। किसानों को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने और उन्हें साहूकारी के बोझ से राहत दिलाने की दिशा में उनके प्रयासों ने सहकारिता की भावना को मजबूती दी।
जिस दौर में ग्रामीण समाज आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा था, उस समय किसानों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने की पहल उनके सामाजिक सरोकारों को दर्शाती है। उनके लिए किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव थे। किसानों को सम्मानजनक जीवन मिले और उन्हें अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े, यह सोच उनके जनहितकारी दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा थी।
किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति शिक्षा के बिना संभव नहीं है। बाबूजी इस सत्य को समझते थे। उन्होंने शिक्षा के विस्तार और विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किए। उस समय जब लड़कियों की शिक्षा को लेकर समाज में अनेक बाधाएं थीं, तब बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने की उनकी सोच दूरदर्शी थी।
पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव ने उनकी जयंती पर आयोजित समारोह में उनके शैक्षिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में महिला विद्यालयों के विस्तार के लिए प्रयास किए। यह योगदान उस सोच का परिचायक है, जिसमें शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना गया।
बाबूजी का संदेश आज भी प्रासंगिक है कि बेटियों को शिक्षा, अवसर और सम्मान देकर ही एक मजबूत समाज का निर्माण किया जा सकता है।
बाबू बृजनंदन लाल कटियार के जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष त्याग और उदारता था। जयंती समारोह में वक्ताओं ने बताया कि उन्होंने क्रिश्चियन इंटर कॉलेज और मिशन अस्पताल के निर्माण के लिए अपनी निजी भूमि दान दी थी। बढ़पुर ब्लॉक सहित अन्य सार्वजनिक भवनों के लिए भूमि देने का उल्लेख भी उनके जनसेवा के भाव को रेखांकित करता है।
भूमि और संपत्ति को व्यक्ति अपनी निजी उपलब्धि मानता है, लेकिन बाबूजी ने समाज की आवश्यकताओं को महत्व दिया। उनके लिए संपत्ति का वास्तविक मूल्य तभी था, जब उससे लोगों का जीवन बेहतर बनाया जा सके। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए निजी संसाधनों का उपयोग करने की उनकी भावना आज भी समाजसेवा का प्रेरक उदाहरण है।
बाबूजी की सबसे बड़ी विशेषताओं में सर्वसमाज के हितों के प्रति समर्पण शामिल था। उनका जीवन इस विचार को मजबूत करता है कि समाज की सेवा किसी जाति, वर्ग या समुदाय की सीमाओं में बंधकर नहीं की जा सकती। अस्पताल, शिक्षण संस्थान और जनहित के कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता समाज को जोड़ने वाली सोच का परिचय देती है।
आज जब सामाजिक जीवन में विभाजन और आपसी अविश्वास की चुनौतियां दिखाई देती हैं, तब ऐसे महापुरुषों का स्मरण और भी आवश्यक हो जाता है। उनकी विरासत हमें सिखाती है कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब हर व्यक्ति को सम्मान मिले और विकास के अवसर सभी तक पहुंचें।
आज की युवा पीढ़ी के सामने अनेक अवसर हैं, लेकिन उनके साथ सामाजिक जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं। बाबू बृजनंदन लाल कटियार का जीवन युवाओं को बताता है कि सफलता का अर्थ केवल व्यक्तिगत उपलब्धि या आर्थिक समृद्धि नहीं है। वास्तविक सफलता वह है, जिससे दूसरे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए।
मुख्य अतिथि न्यायाधीश सर्वेश कुमार ने भी जयंती समारोह में युवाओं से बाबूजी के जीवन पर आधारित पुस्तकों को पढ़ने का आह्वान किया। यह सुझाव केवल इतिहास जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन मूल्यों को समझने का अवसर है, जिनके आधार पर समाज का निर्माण होता है।
युवाओं को उनके जीवन से सेवा, परिश्रम, शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देने की प्रेरणा लेनी चाहिए। महापुरुषों की जयंती तभी सार्थक होती है, जब उनके विचार समारोहों से निकलकर हमारे व्यवहार का हिस्सा बनें।
बढ़पुर स्थित उत्सव भवन में आयोजित जयंती समारोह में वक्ताओं ने बाबूजी के योगदान को याद किया। उनकी स्मृति में प्रकाशित ‘ज्योति पुंज’ का विमोचन भी किया गया। विधायक सुरभि गंगवार ने उनके कार्यों को विधानसभा में प्रमुखता से उठाने की बात कही। यह पहल इस आवश्यकता की ओर ध्यान दिलाती है कि स्थानीय इतिहास के ऐसे महान व्यक्तित्वों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।
बाबूजी की स्मृति को संरक्षित करने, उनके जीवन पर साहित्य उपलब्ध कराने और उनके सामाजिक योगदान का दस्तावेजीकरण करने से फर्रुखाबाद की ऐतिहासिक पहचान भी मजबूत होगी। सार्वजनिक स्थलों पर उनके योगदान की जानकारी उपलब्ध कराना और शिक्षा संस्थानों के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके जीवन से परिचित कराना भी उपयोगी कदम हो सकते हैं।
बैरिस्टर बाबू बृजनंदन लाल कटियार की 134वीं जयंती हमें उनके संघर्ष, त्याग और जनसेवा को याद करने का अवसर देती है। किसानों के हितों की चिंता, शिक्षा का विस्तार, सामाजिक समरसता और सार्वजनिक जरूरतों के लिए निजी संसाधनों का समर्पण उनके जीवन से जुड़े ऐसे मूल्य हैं, जिन्हें आज भी अपनाने की आवश्यकता है।
महापुरुषों की महानता केवल उनकी स्मृतियों में नहीं, बल्कि उन बदलावों में जीवित रहती है, जिन्हें वे समाज के लिए संभव बनाते हैं। बाबूजी का जीवन हमें यही संदेश देता है कि व्यक्ति की असली पहचान उसके पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उसके योगदान से बनती है।
आइए, इस पुण्य स्मरण के अवसर पर हम संकल्प लें कि शिक्षा को बढ़ावा देंगे, जरूरतमंदों की सहायता करेंगे, सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता को महत्व देंगे और जनहित के कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे।
सहकारिता के पुरोधा, समाज सुधारक और जनसेवा के प्रतीक बैरिस्टर बाबू बृजनंदन लाल कटियार को विनम्र श्रद्धांजलि। उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहें।

