- 7.63 प्रतिशत तक टूटे दाम, मंगलवार को ब्रेंट और अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में 0.5 प्रतिशत की तेजी

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार, 3 नवंबर को एशियाई कारोबार के शुरुआती दौर में कच्चे तेल के दाम चढ़ गए। इसकी प्रमुख वजह ईरान के केश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले की खबर बताई जा रही है। इससे पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है।

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट कच्चे तेल का वायदा भाव 48 सेंट यानी 0.5 प्रतिशत बढ़कर 105.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत 47 सेंट की बढ़त के साथ 96.93 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई।

इससे एक दिन पहले सोमवार को बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी। ब्रेंट कच्चा तेल 8.66 डॉलर यानी 7.63 प्रतिशत टूटकर 104.77 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। उस समय अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते निवेशकों ने बिकवाली की थी।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप पर हमला किया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि इन हमलों को रक्षात्मक कार्रवाई बताया गया। इसका उद्देश्य ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमले की क्षमता को सीमित करना था।

केसीएम ट्रेड के मुख्य बाजार विश्लेषक टिम वाटरर के अनुसार, इस घटनाक्रम ने कच्चे तेल की कीमतों में जोखिम का नया दबाव जोड़ दिया है। बाजार में जब कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद बन रही थी, उसी दौरान सैन्य कार्रवाई की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी के अंत में शुरू हुए संघर्ष के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।

ऐसे में इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है। इसके साथ ही परिवहन लागत और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका भी है।

दूसरी ओर ईरान ने सोमवार को कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत जारी है। कतर के मध्यस्थों की मदद से कई दिनों तक चर्चा हुई, लेकिन अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। हालांकि, बातचीत के दौरान पेश किए गए प्रस्तावों में बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर टिकी है। यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। इसका असर आने वाले दिनों में दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन बाजार पर पड़ सकता है।