नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। विपक्षी गठबंधन INDIA की पार्टियों ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ‘सार्वजनिक महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी। इस कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि होटल अशोका में प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति पुलिस के दबाव में रद्द कर दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तैयारियों में भी बाधाएं डाली जा रही हैं। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार विपक्ष को मिलना चाहिए।
विपक्षी दलों की प्रस्तावित रैली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर विरोध जताने की योजना है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग पर पीछे नहीं हटेगी। पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर आयोग की जवाबदेही तय होनी चाहिए। हालांकि, ये कांग्रेस और विपक्षी दलों के आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्षों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया है कि कार्यक्रम को लेकर अनुमति या व्यवस्था में किसी बदलाव के संबंध में स्थिति स्पष्ट की गई है और पुलिस के रुख में बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में होटल अशोका में प्रस्तावित कार्यक्रम और रामलीला मैदान की रैली को लेकर विवाद बना हुआ है। अब सबकी नजर 1 नवंबर को होने वाले विपक्षी कार्यक्रमों और इस मुद्दे पर आगे की राजनीतिक प्रतिक्रिया पर रहेगी।

