डॉ. विजय गर्ग

दीपावली रोशनी, खुशियों, आशाओं और नए संकल्पों का त्योहार है। इस दिन हम अपने घरों, गलियों और आसपास के वातावरण को दीप जलाकर रोशन करते हैं तथा अंधकार को दूर करने का प्रयास करते हैं। लेकिन क्या केवल घरों में दीप जलाने से ही समाज में उजाला आ सकता है? क्या हमारी जिम्मेदारी केवल अपने घरों को रोशन करने तक सीमित है? वास्तव में दीपावली का सच्चा संदेश तभी सार्थक होगा, जब हम समाज में फैले नशे के अंधकार को दूर करने का संकल्प भी लें।

आज पंजाब के सामने नशे की समस्या एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनी हुई है। नशा केवल किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि पूरे परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करता है। नशे की लत के कारण अनेक युवा अपनी पढ़ाई, रोजगार और जीवन के सपनों से दूर हो जाते हैं। माता-पिता की उम्मीदें टूट जाती हैं, परिवारों में तनाव बढ़ता है और अनेक घरों की खुशहाली समाप्त हो जाती है।

पंजाब की पहचान मेहनत, साहस, खेलों, कृषि, समृद्ध संस्कृति और वीरता से रही है। इस धरती के युवाओं ने देश और विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ऐसे में युवा पीढ़ी को नशे से बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है।

नशामुक्त पंजाब के निर्माण के लिए सबसे पहले जागरूकता और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। स्कूलों और कॉलेजों में नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दी जानी चाहिए। शिक्षकों और माता-पिता को बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए, ताकि वे अपनी समस्याओं को बिना किसी डर या झिझक के साझा कर सकें।

खेल, साहित्य, संगीत, वैज्ञानिक गतिविधियां और रचनात्मक कार्य युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा दे सकते हैं। गांवों और शहरों में खेल के मैदान, पुस्तकालय, युवा क्लब और कौशल विकास केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता है। जब युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे, तो वे अपने भविष्य को लेकर अधिक आत्मविश्वासी बनेंगे और नकारात्मक गतिविधियों से दूर रह सकेंगे।

इस संघर्ष में परिवार की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी युवा में नशे की लत के लक्षण दिखाई दें, तो उसे अपमानित करने या परिवार से अलग करने के बजाय प्यार, सहानुभूति और उचित उपचार का सहयोग देना चाहिए। नशे की लत एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसका उपचार संभव है। इसलिए प्रभावित व्यक्तियों को योग्य चिकित्सकों की सलाह, काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना आवश्यक है।

इसके साथ ही नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति और तस्करी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। समाज के लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए नशे के अवैध कारोबार से संबंधित विश्वसनीय जानकारी उचित अधिकारियों तक पहुंचानी चाहिए। नशा बेचने वालों और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को एक ही दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई और नशे से पीड़ित लोगों के लिए उपचार एवं पुनर्वास, दोनों आवश्यक हैं।

दीपावली के अवसर पर हम अपने घरों में अनेक दीप जलाते हैं। इस बार आइए, एक दीप नशामुक्त पंजाब के नाम भी जलाएं। यह दीप केवल मिट्टी का दीपक न हो, बल्कि हमारे मन में जागरूकता, जिम्मेदारी और मानवता की ज्योति का प्रतीक बने। हम संकल्प लें कि अपने बच्चों को नशे से दूर रखेंगे, युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ेंगे और नशे की लत से संघर्ष कर रहे लोगों की सहायता करेंगे।

हमें याद रखना चाहिए कि पटाखों की आवाज कुछ क्षणों तक गूंजती है और दीपों की रोशनी रात भर चमकती है, लेकिन नशामुक्त समाज की रोशनी आने वाली पीढ़ियों तक चमक सकती है।

आइए, इस दीपावली केवल अपने घरों को ही नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य को भी रोशन करें। क्योंकि दीपावली की असली रोशनी पटाखों में नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त पंजाब के सपने में निहित है।

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डॉ. विजय गर्ग

सेवानिवृत्त प्रिंसिपल | शैक्षिक स्तंभकार | प्रख्यात शिक्षाविद्

स्ट्रीट कौर चंद, एम.एच.आर. मलोट, पंजाब – 152107

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