- राजस्व चोरी,पुलिस संरक्षण के आरोप,

फर्रुखाबाद। जहानगंज थाना क्षेत्र के बहोरिकपुर में सड़क किनारे कथित अवैध खनन कर पेट्रोल पंप की टंकी के लिए मिट्टी डाले जाने का मामला सामने आया है। खुलेआम मिट्टी की खुदाई और ढुलाई किए जाने के आरोपों ने खनन विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि खनन बिना वैध अनुमति और निर्धारित नियमों के विरुद्ध हो रहा है, तो यह सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला बन सकता है।

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पेट्रोल पंप की टंकी के लिए मिट्टी की व्यवस्था के नाम पर सड़क किनारे खुदाई की जा रही है। सवाल यह है कि मिट्टी कहां से निकाली जा रही है, इसके लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई है या नहीं और मिट्टी की मात्रा के अनुरूप राजस्व शुल्क जमा किया जा रहा है या नहीं? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

खनन और मिट्टी की खुदाई से जुड़े मामलों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि बहोरिकपुर में बिना अनुमति मिट्टी निकाली जा रही है, तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची? क्या मौके का निरीक्षण किया गया है? खनन की अनुमति, मिट्टी की मात्रा, परिवहन और राजस्व अभिलेखों की जांच हुई है या नहीं? प्रशासन को इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

मामले में स्थानीय पुलिस के संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौके पर मिट्टी की खुदाई और ढुलाई किन परिस्थितियों में हो रही है तथा संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं। जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

बहोरिकपुर में मिट्टी की खुदाई के लिए वैध अनुमति है या नहीं? मिट्टी की निकासी और ढुलाई का लेखा-जोखा कहां है? संभावित राजस्व हानि का आकलन किसने किया? संबंधित विभागों ने मौके का निरीक्षण क्यों नहीं किया, यदि निरीक्षण नहीं हुआ है? संबंध में जब जानकारी की गई तो पता चला किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं है और पेट्रोल पंप मलिक ने भरोसा के एक स्थानीय ठेकेदार बबलू को साढे 18 लख रुपए का ठेका दिया था जो की पुलिस की साठगाठ से काम चल रहा था।

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित विभागों का पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन मौके की जांच कराकर खनन की वैधता, राजस्व अभिलेखों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट करता है या मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाता है।

कथित अवैध खनन कर पेट्रोल पंप की टंकी के लिए मिट्टी डाले जाने का मामला सामने आया है। खुलेआम मिट्टी की खुदाई और ढुलाई किए जाने के आरोपों ने खनन विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि खनन बिना वैध अनुमति और निर्धारित नियमों के विरुद्ध हो रहा है, तो यह सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला बन सकता है।

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पेट्रोल पंप की टंकी के लिए मिट्टी की व्यवस्था के नाम पर सड़क किनारे खुदाई की जा रही है। सवाल यह है कि मिट्टी कहां से निकाली जा रही है, इसके लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई है या नहीं और मिट्टी की मात्रा के अनुरूप राजस्व शुल्क जमा किया जा रहा है या नहीं? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

खनन और मिट्टी की खुदाई से जुड़े मामलों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि बहोरिकपुर में बिना अनुमति मिट्टी निकाली जा रही है, तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची? क्या मौके का निरीक्षण किया गया है? खनन की अनुमति, मिट्टी की मात्रा, परिवहन और राजस्व अभिलेखों की जांच हुई है या नहीं? प्रशासन को इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

मामले में स्थानीय पुलिस के संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौके पर मिट्टी की खुदाई और ढुलाई किन परिस्थितियों में हो रही है तथा संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं। जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

बहोरिकपुर में मिट्टी की खुदाई के लिए वैध अनुमति है या नहीं? मिट्टी की निकासी और ढुलाई का लेखा-जोखा कहां है? संभावित राजस्व हानि का आकलन किसने किया? संबंधित विभागों ने मौके का निरीक्षण क्यों नहीं किया, यदि निरीक्षण नहीं हुआ है? इन सवालों पर जिला प्रशासन, खनन विभाग और राजस्व विभाग को जवाब देना चाहिए।