मेरठ

पति की हत्या के मामलों में मौत की सजा पाने वाली मुस्कान रस्तोगी और रविता को लेकर अब मीरा राठोर का बयान चर्चा में है। अखिल भारत हिंदू महासभा की जिलाध्यक्ष मीरा राठोर ने मथुरा के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर दोनों महिलाओं को फांसी देने के लिए जल्लाद बनने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन अनुमति देता है, तो वह बिना किसी फीस के यह जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। मीरा ने यह भी मांग की कि फांसी देने से पहले दोनों महिलाओं को गंगाजल से शुद्ध किया जाए। हालांकि, उनकी मांग पर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया गया है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

मुस्कान रस्तोगी पर आरोप था कि उसने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या की थी। मामले में शव को टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में छिपाने की बात सामने आई थी। मेरठ की अदालत ने 14 अक्टूबर को मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोनों ने फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया हाई कोर्ट में होगी। दोषियों की अपील पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।

दूसरे मामले में रविता और उसके साथी अमरदीप पर अपने पति अमित कश्यप की हत्या की साजिश रचने का आरोप था। रिपोर्ट के अनुसार, रविता ने हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की थी। अदालत ने इस मामले में भी दोषियों को मौत की सजा सुनाई। दोनों मामलों ने क्षेत्र में व्यापक चर्चा पैदा की है। हालांकि, मौत की सजा पर अमल से पहले कानूनी प्रक्रिया और अपील से जुड़े सभी चरणों का पूरा होना जरूरी है।

मीरा राठोर इससे पहले भी अपने बयानों और गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रह चुकी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ताजमहल परिसर से जुड़े स्थान पर पूजा की थी और अभिनेता शाहरुख खान के खिलाफ विवादित बयान देते हुए उनकी जीभ काटने पर एक लाख रुपये के इनाम की घोषणा भी की थी। अब दोनों महिलाओं को फांसी देने के लिए जल्लाद बनने की उनकी मांग चर्चा में है। उन्होंने जिलाधिकारी से अनुमति देने की अपील की है, लेकिन किसी व्यक्ति की ऐसी इच्छा मात्र से उसे फांसी देने का अधिकार नहीं मिल जाता। इस तरह की सजा पर अमल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से ही किया जाता है।