उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर वाराणसी में भाजपा की हार को लेकर तंज कसा और मतगणना में गड़बड़ी की साजिश का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने लिखा कि वाराणसी में एमएलसी चुनाव में हार से भाजपा हताश है और पार्टी के भीतर भी हालात ठीक नहीं हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “लखनऊ वाले दिल्ली वालों का फोन नहीं उठा रहे हैं।” सपा अध्यक्ष ने आगे दावा किया कि उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनाव में भाजपा पूरी तरह पिछड़ गई है। उनके बयान के बाद प्रदेश की सियासत में चुनावी नतीजों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के संकेत हैं।
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में डॉ. संजयन त्रिपाठी का भी जिक्र किया और भाजपा पर सपा प्रत्याशी को हराने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में कथित साजिश सामने आ गई है। पोस्ट में ‘हाता नहीं भाता’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष किया और आरोप लगाया कि पार्टी जनसमर्थन के बजाय गलत तरीकों से चुनाव जीतती है। हालांकि, ये आरोप अखिलेश यादव की ओर से लगाए गए हैं; इनके संबंध में स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
सपा अध्यक्ष ने डॉ. संजयन त्रिपाठी के कथित उत्पीड़न और उनके भावुक होने का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक समाज इस घटना को नहीं भूलेगा। उन्होंने भाजपा सरकार पर शिक्षकों के अपमान का आरोप भी लगाया। इसके अलावा, अखिलेश यादव ने शिक्षकों से चारा इकट्ठा करने जैसे काम करवाने के कथित षड्यंत्र का जिक्र कर प्रदेश सरकार को घेरने की कोशिश की। उनके बयान में शिक्षक समुदाय से जुड़े मुद्दों को भी चुनावी विवाद के साथ जोड़ा गया। सपा प्रमुख ने इन आरोपों के जरिए भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाए और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद अखिलेश यादव का यह बयान भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है। एक ओर सपा प्रमुख ने वाराणसी में हार और मतगणना को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर उनके आरोपों की पुष्टि के लिए चुनाव से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान अहम होंगे। चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों का समाधान तथ्यों, प्रमाणों और सक्षम चुनावी अधिकारियों की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।

