खाया गया कि महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में राक्षस बाधा डालते हैं। यज्ञ की रक्षा के लिए वे राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने की अनुमति मांगते हैं। गुरु के साथ वन पहुंचे श्रीराम और लक्ष्मण को ताड़का के आतंक का सामना करना पड़ता है। ताड़का ऋषि-मुनियों की तपस्या और यज्ञ में विघ्न डालती थी। महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पर श्रीराम उसका वध कर देते हैं।
ताड़का वध के दृश्य ने बांधा समां
कलाकारों ने युद्ध के दृश्य और प्रभावशाली संवादों के माध्यम से ताड़का वध का मंचन किया। श्रीराम के पराक्रम और धर्म की रक्षा के प्रसंग ने दर्शकों का ध्यान खींचा। रामलीला के माध्यम से संदेश दिया गया कि अधर्म और अत्याचार का अंत निश्चित है तथा धर्म की रक्षा करना प्रत्येक युग में महत्वपूर्ण है।
रामलीला देखने के लिए मैदान में श्रद्धालु जुटे। मंचन के दौरान धार्मिक माहौल बना रहा और दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद लिया।



