भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन ‘गगनयान’ की पहली मानवरहित परीक्षण उड़ान अगले दो महीनों के भीतर आयोजित किए जाने की योजना है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। श्री रामचंद्र उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र के दीक्षांत समारोह के बाद उन्होंने बताया कि गगनयान-1 (G1) मिशन को एचएलवीएम-3 रॉकेट की मदद से श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाएगा। इस उड़ान का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले मिशन की विभिन्न प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता का परीक्षण करना है। यह भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण होगा।
गगनयान-1 एक मानवरहित परीक्षण मिशन होगा, जिसमें ‘व्योममित्र’ नाम के अर्ध-मानव रोबोट को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा। इस मिशन में मानव उड़ान के लिए तैयार किए गए एचएलवीएम-3 रॉकेट और स्वदेशी क्रू मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जाएगा। इसरो अब तक मिशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण परीक्षण कर चुका है। इनमें पैराशूट प्रणाली की मदद से क्रू मॉड्यूल को सुरक्षित उतारने से जुड़े परीक्षण, क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को अलग करने की प्रक्रिया, एपेक्स कवर का पृथक्करण और क्रू मॉड्यूल को सही स्थिति में लाने वाली प्रणाली का परीक्षण शामिल है। इसरो ने भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट भी पूरा कर लिया है।
गगनयान के तहत भारत का लक्ष्य तीन सदस्यीय दल को लगभग 400 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा में तीन दिनों के मिशन पर भेजना है। इसके बाद अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाकर भारतीय समुद्री क्षेत्र में उतारने की योजना है। मानवयुक्त उड़ान से पहले व्योममित्र सहित अतिरिक्त मानवरहित परीक्षण मिशन भी किए जाएंगे, ताकि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी सभी प्रणालियों को परखा जा सके। डॉ. नारायणन ने कहा कि पहले मानवयुक्त मिशन की संभावित समयसीमा की घोषणा प्रधानमंत्री करेंगे। इसरो के लिए इन परीक्षणों का सफल होना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी के आधार पर भारत अपनी स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन कर सकेगा।
इसरो अध्यक्ष ने तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के कुलशेखरपट्टिनम में बन रहे नए अंतरिक्ष केंद्र और देश की लॉन्च क्षमता बढ़ाने की योजनाओं पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2029-30 तक हर साल 50 रॉकेट लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल श्रीहरिकोटा में दो लॉन्च पैड हैं, जबकि एक अतिरिक्त लॉन्च पैड श्रीहरिकोटा और दूसरा कुलशेखरपट्टिनम में विकसित किया जा रहा है। कुलशेखरपट्टिनम केंद्र का इस्तेमाल मुख्य रूप से छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों (SSLV) के लिए किया जाएगा। निजी कंपनियों की भूमिका पर उन्होंने स्पष्ट किया कि लॉन्च पैड के संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी का अर्थ इसरो का निजीकरण नहीं है। उनके मुताबिक, इसरो भारत सरकार का विभाग है और निजी कंपनियों तथा स्टार्ट-अप्स को मार्गदर्शन देकर देश के अंतरिक्ष क्षेत्र को मजबूत किया जा रहा है।

