देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन किया। INDIA गठबंधन के कई प्रमुख नेताओं ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में हिस्सा लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष पिछले कई दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
रैली से पहले INDIA गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के मिंटो ब्रिज से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला। दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुए इस मार्च में बड़ी संख्या में विपक्षी कार्यकर्ता शामिल हुए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी खुली गाड़ी में नजर आए, जबकि अन्य नेता भी काफिले के साथ आगे बढ़े। दोपहर करीब 12:30 बजे कई बड़े नेता मार्च में शामिल हुए। इसके बाद रामलीला मैदान में सभा आयोजित की गई, जहां विपक्षी नेताओं ने बारी-बारी से मंच से अपनी बात रखी। इससे एक दिन पहले शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक हुई थी, जिसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित करने की बात सामने आई।
रविवार को आयोजित सभा में राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया जाएगा और उन्हें जेल भी जाना पड़ेगा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस लड़ाई को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाएगा और कथित वोट चोरी के मामलों में कार्रवाई की मांग करेगा। राहुल ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य नफरत फैलाना नहीं, बल्कि देश में मोहब्बत और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना है। रैली में अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।
करीब चार घंटे तक चले इस पूरे कार्यक्रम के दौरान विपक्षी दलों ने SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। पिछले 25 दिनों में विपक्षी गठबंधन का यह सातवां संयुक्त प्रदर्शन बताया गया। दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों और रैली में भीड़ जुटने के दावों पर सवाल खड़े किए। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, बल्कि उन्होंने वर्ष 2025 में यह जिम्मेदारी संभाली थी। उन्होंने रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों के जुटने के दावे पर भी सवाल उठाते हुए खाली कुर्सियों की तस्वीरें दिखाईं। इस तरह ज्ञानेश कुमार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। फिलहाल विपक्ष अपनी मांगों पर कायम है, जबकि भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को लेकर जवाबी सवाल उठाए हैं।




