फर्रुखाबाद
पीईटी परीक्षा में शामिल होने के लिए दूसरे जिलों से फर्रुखाबाद पहुंचे अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा। किसी का परीक्षा केंद्र 500 किलोमीटर से अधिक दूर बना तो किसी को रहने और खाने-पीने के लिए जूझना पड़ा। शनिवार रात फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी ठहरने को मजबूर हुए। कोई यात्री प्रतीक्षालय की बेंच पर लेटा था तो कोई फर्श पर बैठकर रात गुजार रहा था। कई अभ्यर्थी प्लेटफॉर्म पर बैठकर परीक्षा की तैयारी करते नजर आए।
रविवार को पीईटी परीक्षा का तीसरा दिन था। परीक्षा देने के लिए शनिवार शाम से ही अभ्यर्थियों का फर्रुखाबाद पहुंचना शुरू हो गया था। रात करीब 10 बजे रेलवे स्टेशन पर लगभग 40 अभ्यर्थी यात्री प्रतीक्षालय में मौजूद थे, जबकि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्लेटफॉर्म पर भी ठहरे हुए थे। आजमगढ़ से आए अभ्यर्थियों ने बताया कि उनका परीक्षा केंद्र 518 किलोमीटर दूर बनाया गया है। इतनी लंबी दूरी तय करने में उन्हें कई दिन लग गए। शुक्रवार को घर से निकले अभ्यर्थी शनिवार को फर्रुखाबाद पहुंचे।
आजमगढ़ निवासी संजय कुमार ने बताया कि वह बीएड कर चुके हैं और प्रवक्ता पद की परीक्षा भी दे चुके हैं। भविष्य में भर्ती निकलने की उम्मीद में उन्होंने पीईटी का आवेदन किया था, लेकिन परीक्षा केंद्र 518 किलोमीटर दूर मिलने से उन्हें काफी परेशानी हुई। उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्र की जानकारी करीब एक सप्ताह पहले मिली थी। तभी से वह मानसिक तनाव में थे। तीन दिन पहले घर से निकलना पड़ा। रास्ते में खाने-पीने और ठहरने की समस्या रही। लंबी यात्रा के कारण थकान इतनी हो गई कि परीक्षा से पहले ठीक से पढ़ाई भी नहीं कर सके।
अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा की तैयारी करने के साथ ही उन्हें अब लंबी दूरी की यात्रा और रहने की व्यवस्था की चिंता भी करनी पड़ रही है। दूर परीक्षा केंद्र मिलने से आर्थिक बोझ बढ़ता है। परिवार के लोग भी अभ्यर्थियों की सुरक्षा और उनके पहुंचने को लेकर परेशान रहते हैं। अभ्यर्थियों ने सरकार से अनुरोध किया कि भविष्य में परीक्षा केंद्र नजदीकी जिले या मंडल में ही आवंटित किए जाएं, जिससे युवाओं को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
आजमगढ़ से आए सचिन ने बताया कि वह फर्रुखाबाद पहुंचने के बाद होटल में कमरा लेने गए थे। वहां एक कमरे का किराया 1500 रुपये बताया गया। इतनी रकम खर्च करना उनके लिए मुश्किल था। मजबूरी में वह वापस रेलवे स्टेशन आ गए और वहीं रात गुजारने का फैसला किया। स्टेशन पर कुछ अभ्यर्थी पढ़ाई कर रहे थे तो कुछ थकान के कारण बेंच और फर्श पर लेटे हुए थे।
अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पहले ही काफी समय और पैसा खर्च होता है। ऐसे में सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र मिलने से यात्रा, भोजन और ठहरने का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। उनका कहना था कि परीक्षा व्यवस्था में अभ्यर्थियों की सुविधा और आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि उन्हें परीक्षा देने से पहले ही इतनी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।




