न
लखनऊ। राजधानी में सोमवार को सफाई कर्मचारियों ने नगर निगम मुख्यालय के सामने टेंट लगाकर प्रदर्शन किया। कर्मचारी दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करते हुए अपनी छह सूत्री मांगों को उठाया। सफाई कर्मचारी संघर्ष संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही है और ठेकेदारों की मनमानी के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना था कि ठेके पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि सरकार और संबंधित विभागों के स्तर पर उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। कर्मचारियों ने छह सूत्री मांगों के माध्यम से वेतन, सेवा संबंधी सुविधाओं और ठेकेदारी व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।
मोर्चा के मुख्य संयोजक राम प्रकाश वाल्मीकि ने कहा कि प्रदेश में सफाई कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में सफाई कर्मचारियों के परिवारों को राहत देने के लिए ऐसी कोई प्रभावी योजना या शासनादेश जारी नहीं हुआ, जिससे उनकी स्थिति में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश का स्वच्छकार समाज अपने बच्चों के भविष्य और परिवार के भरण-पोषण की चिंता लेकर अपनी मांगें उठाने आया है।
प्रदर्शन के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ के नाम पर होने वाली कटौती का रहा। मोर्चा के संयोजक ओमीलाल वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि ठेकेदार सफाई कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि (ईपीएफ) के नाम पर पैसा काटते हैं, लेकिन कर्मचारियों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों पर धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इस मामले की जांच कराने और कर्मचारियों को उनका पूरा लाभ दिलाने की मांग की।
धरने में शामिल पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ वाल्मीकि ने सफाई कार्य को आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी के माध्यम से कराए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सफाई का काम लगातार चलने वाली आवश्यक सेवा है, इसलिए इसे ठेके पर कराने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, ऐसी व्यवस्था कर्मचारियों के हितों और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी छह सूत्री मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगा। साथ ही मांगें पूरी नहीं होने पर कार्य बहिष्कार करने की भी चेतावनी दी गई। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन कटौती, ईपीएफ का लाभ और ठेकेदारी व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का समाधान होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।




