यूपी सरकार की याचिका स्वीकार, गवाहों को धमकाने और गंभीर आपराधिक मामलों को बनाया गया आधार
कन्नौज। पूर्व ब्लॉक प्रमुख एवं बहुचर्चित रेप मामले में कथित आरोपी नवाब सिंह यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।
गैंगस्टर एक्ट के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई में यूपी सरकार की विशेष अनुमति याचिका स्वीकार करते हुए न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।
पुलिस के मुताबिक, नवाब सिंह यादव के खिलाफ कोतवाली कन्नौज में वर्ष 2024 में पॉक्सो एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करने वाली महिला चिकित्सक को न्यायालय में गवाही देने से रोकने के उद्देश्य से धमकाए जाने का भी आरोप सामने आया था। इस संबंध में वर्ष 2025 में अलग से मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने इन मामलों और कथित आपराधिक गतिविधियों को आधार बनाकर 13 जुलाई 2025 को नवाब सिंह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल 2026 को नवाब सिंह यादव को जमानत दे दी थी। इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका एसएलपी क्रिमिनल नंबर 15873/2026 दाखिल की थी।
पुलिस के अनुसार, प्रभावी पैरवी के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने तीन नवंबर को हाईकोर्ट से मिली जमानत निरस्त कर दी।



